अखिलेश यादव की IAS अधिकारियों को सलाह, बोले- भावावेश में न दें इस्तीफा, ‘पीड़ा’ ही बढ़ा रही है ‘PDA’ का कारवां

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही द्वारा प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए दिए गए इस्तीफे ने अब सियासी रंग ले लिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने रिंकू सिंह राही सहित सभी ईमानदार अधिकारियों से भावुक होकर फैसले न लेने की अपील की है।

बीजेपी में ईमानदार अफसरों की पूछ नहीं

सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ (X) पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा बीजेपी सरकार में कुशल और ईमानदार अधिकारियों की कोई अहमियत नहीं है। यहां केवल उन लोगों की पूछ है जो “निवेश में 5% प्रवेश शुल्क” वसूलते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इस सरकार में उन्हीं का बोलबाला है जिनकी चोरी के पैसों की ही चोरी हो जाती है।

‘जो पीड़ित, वो PDA’ का नया नारा

अखिलेश यादव ने आईएएस रिंकू सिंह राही के संघर्ष को अपने राजनीतिक एजेंडे ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) से जोड़ते हुए कहा पीड़ा बढ़ रही है, इसीलिए पीडीए बढ़ रहा है, क्योंकि ‘जो पीड़ित है, वही पीडीए है’। हर अच्छे अधिकारी से हमारी मांग है कि भावावेश में आकर इस्तीफा न दें, क्योंकि बुरे दिन जाने वाले हैं।

अफसरों को दिया ‘भविष्य’ का भरोसा

पूर्व मुख्यमंत्री ने वादा किया कि आगामी समय में बनने वाली ‘पीडीए सरकार’ जनता की सरकार होगी। उन्होंने कहा कि तय समय सीमा के भीतर क्वालिटी वर्क के लिए हमेशा बेहतरीन ऑफिसर्स की जरूरत होती है। हमने हमेशा पारंगत अधिकारियों की कद्र की है और आगे भी करेंगे। अखिलेश ने आश्वासन दिया कि नई व्यवस्था में सभी को उनकी योग्यता के अनुसार उचित मान-सम्मान और स्थान दिया जाएगा।

कौन हैं रिंकू सिंह राही?

2009 में छात्रवृत्ति घोटाले का खुलासा करने पर उन पर जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें उन्हें 7 गोलियां लगी थीं। 2022 बैच के आईएएस राही ने 31 मार्च को इस्तीफा देते हुए आरोप लगाया था कि उन्हें लंबे समय से साइडलाइन किया जा रहा था। उन्हें वेतन तो मिल रहा था, लेकिन जनसेवा की जिम्मेदारी नहीं दी जा रही थी, जिसे उन्होंने अपनी सबसे बड़ी ‘पीड़ा’ बताया।

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