छात्रों का निष्कासन वापस ले अम्बेडकर विश्वविद्यालय: मनोज पासवान

Lucknow News: बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (BBAU) लखनऊ में 29 छात्रों के निष्कासन और उन पर लगाए गए भारी आर्थिक जुर्माने को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। समाजवादी छात्र सभा के राष्ट्रीय महासचिव मनोज पासवान ने इस कार्रवाई के विरोध में विश्वविद्यालय के कुलपति (वाइस चांसलर) को एक तीखा पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा गत 6 जुलाई को कथित तौर पर हिंसा और लूटपाट के आरोपों के तहत छात्रों को बाहर करने और उन पर आर्थिक दंड थोपने के फैसले पर गंभीर आपत्ति जताई है।

कुलपति को संबोधित पत्र में मनोज पासवान ने विश्वविद्यालय के मूल उद्देश्यों को याद दिलाते हुए कहा, एक विशेष संवैधानिक प्रयास और संकल्प के तहत इस केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी, ताकि विशेष रूप से अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों को उच्च व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समान अवसर मिल सकें। लेकिन बेहद अफसोस की बात है कि पिछले कुछ वर्षों से परिसर का माहौल लगातार अराजक और दमनकारी होता जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन के इन फैसलों का सबसे प्रतिकूल और सीधा असर एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग से आने वाले गरीब छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है।

समानता के प्रतीक स्थल पर ही अधिकारों के लिए संघर्ष को विवश हुए वंचित

समाजवादी छात्र सभा के राष्ट्रीय महासचिव ने विश्वविद्यालय के मौजूदा हालातों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी विडंबना और दुखद स्थिति है कि जिस महापुरुष (डॉ. भीमराव अम्बेडकर) ने वंचितों को समाज में बराबरी का हक दिलाया, संविधान के जरिए उच्च शिक्षा के मार्ग खोले और अधिकारों की लड़ाई लड़ी, आज उन्हीं के नाम पर स्थापित शिक्षण संस्थान में दलित छात्रों को अपनी शिक्षा, मान-सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने कुलपति से इस दमनकारी नीति को तुरंत वापस लेने और छात्रों के निलंबन व जुर्माने को रद्द करने की मांग की है।

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