IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर आरोप तय, 7 आरोपी बरी
Sandesh Wahak Digital Desk: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आईआरसीटीसी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख एवं पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए हैं। वहीं, अदालत ने पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में सात आरोपियों को बरी भी कर दिया। इस चर्चित मामले की अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) विशाल गोगने ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, सरला गुप्ता के अलावा लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी और सुजाता होटल्स जैसी व्यावसायिक इकाइयों पर आरोप तय करने का आदेश दिया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत नहीं होता कि लालू यादव के खिलाफ की गई जांच राजनीतिक रूप से प्रभावित थी। इसके अतिरिक्त, अदालत ने उल्लेख किया कि लारा प्रोजेक्ट्स को जिस तरह कथित तौर पर अनुचित लाभ पहुंचाया गया, उससे लालू प्रसाद यादव की भूमिका पर गंभीर संदेह उत्पन्न होता है।
टेंडर आवंटन में हेरफेर का आरोप
केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के अनुसार, यह मामला वर्ष 2004 से 2009 के दौरान लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते हुए आईआरसीटीसी के रांची और पुरी स्थित दो प्रमुख होटलों के लीज आवंटन से जुड़ा है। आरोप है कि सुजाता होटल्स को टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर करके ये होटल लीज पर दिए गए। इसके बदले में बाजार दर से बेहद कम कीमत पर करोड़ों रुपये मूल्य की बेशकीमती जमीन एक ऐसी कंपनी को हस्तांतरित की गई, जिसका प्रत्यक्ष संबंध राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव से था। सीबीआई की इसी एफआईआर के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पीएमएलए के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था।
इससे पूर्व 13 अक्टूबर 2025 को इसी अदालत ने सीबीआई वाले मूल मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी की धाराओं में आरोप तय किए थे। दूसरी ओर, यादव परिवार और आरजेडी शुरू से ही इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे केंद्र सरकार की राजनीतिक साजिश करार देते रहे हैं। मामले में सीबीआई की तरफ से विशेष लोक अभियोजक डीपी सिंह ने पैरवी की, जबकि बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनींदर सिंह ने अदालत में दलीलें पेश कीं।
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