BRICS शिखर सम्मेलन के लिए भारत आएंगे शी जिनपिंग, गलवान हिंसा के बाद पहली द्विपक्षीय वार्ता संभव
Sandesh Wahak Digital Desk: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सितंबर में नई दिल्ली में आयोजित होने जा रहे 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत की यात्रा करेंगे। चीन के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से राष्ट्रपति जिनपिंग की भारत यात्रा की पुष्टि कर दी है। शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक होने की प्रबल संभावना व्यक्त की जा रही है। यदि दोनों शीर्ष नेताओं के बीच यह बैठक होती है, तो जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद यह पहला मौका होगा जब शी जिनपिंग भारतीय सरजमीं पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। इससे पहले शी जिनपिंग वर्ष 2019 में भारत के अनौपचारिक दौरे पर आए थे।
गलवान घाटी हिंसा के बाद उपजे तनाव के बीच पहला बड़ा कूटनीतिक मौका
जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई भीषण झड़प के बाद दोनों देशों के कूटनीतिक और सैन्य संबंधों में भारी तनाव आ गया था। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में भारतीय सेना के 20 जाबांज जवान शहीद हो गए थे, जबकि लंबे समय बाद चीन ने भी स्वीकार किया था कि उसके चार सैनिक मारे गए थे। इस सीमा विवाद के बाद से ही दोनों देशों के बीच शीर्ष स्तर पर सीधी बातचीत लगभग रुकी हुई थी, जिसे देखते हुए इस आगामी यात्रा को बेहद अहम माना जा रहा है।
12-13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन, पुतिन भी होंगे शामिल
नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस बार सम्मेलन में चीन और रूस सहित कुल 11 सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत दौरे पर आ रहे हैं, जिससे यह सम्मेलन वैश्विक राजनीति और वैश्विक आर्थिक रणनीतियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
NSA अजीत डोभाल के चीन दौरे के बाद बनी सहमति
शी जिनपिंग की भारत यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई थी। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने हाल ही में 24 अगस्त को चीन का दौरा किया था। 25 अगस्त को उन्होंने चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ उच्च स्तरीय वार्ता की। इस बैठक के दौरान सीमा पर जारी गतिरोध को खत्म करने, वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति स्थापित करने और द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई थी।
सीमा विवाद के साथ व्यापार घाटे और रेयर अर्थ सप्लाई पर भी रहेगी नजर
पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच संभावित बैठक का दायरा केवल सीमा विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापारिक और आर्थिक संबंध भी प्रमुख एजेंडे में शामिल होंगे। भारत लंबे समय से चीन के साथ अपने भारी व्यापार घाटे को संतुलित करने का प्रयास कर रहा है। इसके साथ ही, भारत रेयर अर्थ मैगनेट और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक सामानों की आपूर्ति के लिए चीन पर अपनी निर्भरता कम करने की रणनीति पर काम कर रहा है। ऐसे में यह संभावित मुलाकात भारत-चीन संबंधों की भावी दिशा तय करने में निर्णायक साबित हो सकती है।
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