30 की उम्र में भी हार्ट अटैक का खतरा! डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट ने दी चेतावनी
हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रेस बने सबसे बड़े दुश्मन, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपक चौधरी बोले- बदलती लाइफस्टाइल और अनदेखी पड़ रही भारी
Sandesh Wahak Digital Desk: देश में हार्ट अटैक अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है। हाल के वर्षों में जिम में वर्कआउट करते युवाओं, खेल के मैदान में बच्चों और कामकाजी महिलाओं में अचानक हार्ट अटैक के मामलों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भागदौड़ भरी जिंदगी, खराब खान-पान और मानसिक तनाव इस गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के मुख्य कारक बनकर उभरे हैं।
क्यों बढ़ रहा है जोखिम? प्रमुख कारण
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. दीपक कुमार चौधरी के अनुसार, इन सात कारणों पर नियंत्रण पाकर जीवन बचाया जा सकता है।
हाई ब्लड प्रेशर (साइलेंट किलर): यह दिल की मांसपेशियों पर लगातार दबाव डालता है, जिससे हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ता है।
डायबिटीज: शुगर लेवल अनियंत्रित होने से रक्त वाहिकाएं कमजोर हो जाती हैं।
हाई कोलेस्ट्रॉल: नसों में वसा (Fat) जमा होने से रक्त का प्रवाह बाधित होता है।
मोटापा और सुस्त जीवनशैली: व्यायाम की कमी बीपी और शुगर को सीधे दावत देती है।
नशा (धूम्रपान और शराब): तंबाकू और अल्कोहल सीधे तौर पर धमनियों को सख्त और क्षतिग्रस्त कर देते हैं।
मानसिक तनाव: आज के दौर में अत्यधिक तनाव दिल की धड़कन और रक्त वाहिकाओं पर बुरा असर डाल रहा है।
विशेषज्ञ की सलाह: नियमित जांच ही सबसे बड़ा कवच
डॉ. दीपक चौधरी ने बताया कि हार्ट अटैक अचानक आता जरूर है, लेकिन इसके संकेत शरीर पहले से देने लगता है। उन्होंने सुझाव दिया कि 30 साल की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार हृदय जांच (ECG/TMT) जरूर कराएं। सीने में भारीपन, सांस फूलना या अचानक पसीना आने को ‘गैस’ समझकर नजरअंदाज न करें। सही समय पर इलाज और जीवनशैली में बदलाव से जोखिम को 80% तक कम किया जा सकता है।
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