Varanasi News: जालसाजों ने की DIG दफ्तर और आवास को अपने नाम कराने की कोशिश, मुकदमा दर्ज
Varanasi News: वाराणसी से धोखाधड़ी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसे सुनकर हर कोई दंग है। अमूमन जालसाज आम लोगों की या निजी जमीनों पर अवैध कब्जा करने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करते हैं, लेकिन इस बार भू-माफियाओं ने सीधे पुलिस महकमे को ही निशाना बना लिया। आरोपियों ने मकबूल आलम रोड पर स्थित डीआईजी रेंज कार्यालय और उनके सरकारी आवास की जमीन को ही अपने नाम कराने की बड़ी साजिश रच डाली। इस दुस्साहस का खुलासा होने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। क्षेत्रीय लेखपाल की शिकायत पर कैंट थाना पुलिस ने छह नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है।
सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, नगर निगम के असेसमेंट रजिस्टर में यह पूरी जमीन पुलिस उपमहानिरीक्षक कार्यालय और सरकारी आवास के रूप में दर्ज है। आरोप है कि चौक इलाके के राजा दरवाजा निवासी आनंद अग्रवाल नाम के व्यक्ति ने बहुत पहले नगर निगम को अंधेरे में रखकर इस सरकारी प्रॉपर्टी का म्यूटेशन (नामांतरण) अपने नाम करा लिया था। साल 2019 में आनंद अग्रवाल की मौत के बाद उनके बेटे गुंजन अग्रवाल ने एक गैर-पंजीकृत वसीयत के दम पर खुद को वारिस बताते हुए कोर्ट में अर्जी लगा दी। हालांकि, सरकारी वकीलों की आपत्ति के बाद साल 2022 में अदालत ने पुख्ता सबूत न होने के कारण गुंजन की याचिका को खारिज कर दिया था।
कोर्ट से झटका लगने के बावजूद इन जालसाजों के हौसले पस्त नहीं हुए। उन्होंने उसी फर्जी वसीयत और हेरफेर किए गए दस्तावेजों के सहारे दोबारा इस कीमती सरकारी संपत्ति पर कब्जा जमाने और म्यूटेशन कराने का सुनियोजित प्रयास किया। इस महाफर्जीवाड़े में पुलिस ने गुंजन अग्रवाल के अलावा उसके मददगारों स्मृता गोयल, इला अग्रवाल, बृजेश अग्रवाल, शरद अग्रवाल और मयंक अग्रवाल को नामजद किया है। इन सभी पर मिलीभगत कर अदालत को गुमराह करने और सरकारी संपत्ति हड़पने के लिए जाली दस्तावेज तैयार करने का आरोप है। फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है।
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