अंतिम संस्कार के नाम पर पैसे का खेल! रेलवे से 7 हजार लेने वाली GRP संस्था को देती है सिर्फ 400 रुपए
Aligarh News: मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला एक मामला सामने आया है। रेलवे ट्रैक या स्टेशन परिसर में मिलने वाले अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार के लिए जीआरपी (Government Railway Police) रेलवे प्रशासन से प्रति शव 7,000 रुपये लेती है, लेकिन अंतिम संस्कार करने वाली संस्था को सिर्फ 400 रुपये दिए जाते हैं। बाकी रकम कहां खर्च होती है, इसका स्पष्ट जवाब किसी अधिकारी के पास नहीं है। मामले के सामने आने के बाद जीआरपी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
अलीगढ़ में वर्ष 2004 से मानव उपकार संस्था जीआरपी की ओर से मिलने वाले अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार कर रही है। संस्था के साथ हुए समझौते के समय जीआरपी को प्रति शव 400 रुपये का बजट मिलता था, इसलिए वही राशि संस्था को दी जाती थी।
समय के साथ रेलवे प्रशासन ने बढ़ती महंगाई को देखते हुए इस बजट को बढ़ाकर 400 रुपये से 800, 1200, 2000, 5000 और मई 2026 से 7,000 रुपये प्रति शव कर दिया, लेकिन संस्था को आज भी सिर्फ 400 रुपये ही दिए जा रहे हैं।
कैसे होती है पूरी प्रक्रिया?
रेलवे ट्रैक या स्टेशन परिसर में कोई अज्ञात शव मिलने पर जीआरपी उसे कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजती है। पहचान के प्रयास किए जाते हैं। यदि 72 घंटे तक शव की पहचान नहीं होती, तो पोस्टमार्टम के बाद उसे मानव उपकार संस्था को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया जाता है।
संस्था का कहना है कि उसे आज भी केवल 400 रुपये मिलते हैं, जबकि इसी राशि में कफन, पॉलीथिन और अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था करनी पड़ती है।
संस्था ने कई बार बढ़ाने की मांग की
मानव उपकार संस्था के अध्यक्ष विष्णु कुमार बंटी का कहना है कि वर्ष 2004 से लगातार वही 400 रुपये मिल रहे हैं। महंगाई बढ़ने के बावजूद कई बार मौखिक रूप से राशि बढ़ाने की मांग की गई, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
बाकी रकम कहां खर्च होती है?
सूत्रों के मुताबिक, जीआरपी शेष राशि को शव उठाने वाले मजदूरों की मजदूरी, पोस्टमार्टम के दौरान सिलाई, पहचान के लिए पोस्टर छपवाने जैसे मदों में खर्च दिखाती है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक रिकॉर्ड या स्पष्ट साक्ष्य सामने नहीं आए हैं।
अधिकारियों ने क्या कहा?
मामले पर जीआरपी के स्थानीय अधिकारियों ने पूरी जानकारी होने से इनकार किया है।
- प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र कुमार द्विवेदी ने कहा कि व्यवस्था की समीक्षा कराई जाएगी।
- सीओ जीआरपी उदय प्रताप ने भी कहा कि पहले पूरी जानकारी ली जाएगी।
- वहीं डीजी जीआरपी प्रकाश डी ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच कराने और नियमों के अनुसार कार्रवाई का भरोसा दिया।
एक नजर में पूरा मामला
- जीआरपी को प्रति अज्ञात शव अब ₹7,000 का बजट मिलता है।
- अंतिम संस्कार करने वाली संस्था को आज भी सिर्फ ₹400 दिए जाते हैं।
- मई 2026 से बजट ₹5,000 से बढ़ाकर ₹7,000 किया गया।
- पिछले पांच वर्षों में 67 अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार कराया गया।
- अतिरिक्त राशि के उपयोग पर स्पष्ट जवाब नहीं मिलने से पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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