लखनऊ ने प्यारा इंसान और उर्दू ने अपना सच्चा सेवक खो दिया: परवेज़ मलिक ज़ादा

Lucknow News: आफ़ताब असर टांड़वी का निधन केवल एक शायर का निधन नहीं है, बल्कि एक ऐसे बेहद मोहब्बत करने वाले इंसान का बिछड़ना है, जो दूसरों की साहित्यिक महफिलों के लिए दिन-रात मेहनत करता था। पूरे शहर में घूम-घूमकर साहित्यिक कार्यक्रमों के कार्ड बांटना, कार्यक्रम स्थलों पर बैनर लगाना तथा साहित्यिक आयोजनों के दौरान लोगों को चाय-नाश्ता उपलब्ध कराना जैसी जिम्मेदारियां भी वह स्वयं उठाते थे। यही कारण था कि मैं और कुछ अन्य लोग उन्हें ‘उर्दू का सच्चा सेवक’ कहते थे, जो उनके लिए बिल्कुल उचित था। लखनऊ शहर ने एक बेहद प्यारा इंसान खो दिया है, जो हर व्यक्ति के सुख-दुख में सहभागी रहता था। अल्लाह पाक आफ़ताब असर टांड़वी की मगफिरत फरमाए और उनके परिजनों को सब्र-ए-जमील अता करे।

उक्त विचार परवेज़ मलिक ज़ादा ने अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन स्टडीज़ में आफ़ताब असर टांड़वी की याद में आयोजित श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए।

अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन स्टडीज़ के प्रमुख डॉ. इहतिशाम अहमद खान ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि हमारे शहर-ए-निगारां की मशहूर साहित्यिक एवं सामाजिक शख्सियत आफ़ताब असर टांड़वी अगर केवल शायर होते तो शायद इतने उल्लेखनीय नहीं होते। यदि वह एक उच्च कोटि के साहित्यकार और आलोचक भी होते, तब भी उनकी शख्सियत उतनी महत्वपूर्ण नहीं होती, जितनी उन्हें जनसेवा, कल्याणकारी एवं सामाजिक कार्यों को खुशी और समर्पण के साथ अंजाम देने ने बनाया। हमने कई बार देखा कि वह उर्दू के कार्यक्रमों, विशेषकर नातिया मुशायरों में इबादत समझकर अपनी सेवाएं प्रदान करते थे।

वरिष्ठ पत्रकार ज़ियाउल्लाह सिद्दीकी ने अपने श्रद्धांजलि वक्तव्य में कहा कि आफ़ताब असर टांड़वी का इखलास, त्याग और साहित्यिक महफिलों में उनकी सक्रियता हम युवाओं के लिए मशाल-ए-राह है। वह केवल एक अच्छे शायर ही नहीं, बल्कि लखनवी तहज़ीब के सच्चे अलमबरदार और साहित्य को इबादत समझकर जीने वाले व्यक्ति थे।

इस अवसर पर इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के शिक्षक डॉ. सैयद मोहम्मद सबीह नदवी, तंजीम मुहिब्बान-ए-उर्दू के अध्यक्ष डॉ. इरशाद अहमद खान बयारवी, आधुनिक उर्दू साहित्य फाउंडेशन के सचिव डॉ. शुजा-उल-हक, डॉ. सैयद अनवर सफी, डॉ. नाज़िर हुसैन, डॉ. एजाज़ अहमद, मौलाना अब्दुल करीम नदवी, यूनुस सलीम आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

वक्ताओं ने कहा कि मरहूम आफ़ताब असर टांड़वी कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी रिश्तों की डोर को टूटने नहीं देते थे। वह हर हाल में सब्र और शुक्र से काम लेते थे। उर्दू भाषा और साहित्य के प्रति उनकी निस्वार्थ सेवाओं को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। उनकी जैसी विनम्रता और सादगी अब देखने को तरस जाएंगे।

Also Read: ममता बनर्जी के काफिले पर हमला, गाड़ी पर फेंके गए पत्थर और कीचड़

Get real time updates directly on you device, subscribe now.