Middle East Crisis: ईरान पर 12वीं रात बरसे अमेरिकी बम, तो हूती ने लाल अगर में 2 टैंकर पर दागी मिसाइल
Middle East Crisis: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। एक ओर अमेरिका ने लगातार 12वीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में दो तेल टैंकरों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाकर समुद्री सुरक्षा को नई चुनौती दे दी है। इस बीच अमेरिका और सऊदी अरब के बीच हुए नागरिक परमाणु सहयोग समझौते ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि लगातार 12वीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए। अमेरिकी सेना का दावा है कि इन ऑपरेशनों का उद्देश्य उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों और रणनीतिक ठिकानों पर हमलों के लिए किया जाता है।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, दक्षिण-पश्चिमी शहर रामशिर, अहवाज और बुशहर प्रांत में अमेरिकी मिसाइल हमले हुए। वहीं स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शालमचेह बॉर्डर क्रॉसिंग पर हुए हमले में दो लोगों की मौत हुई है।
लाल सागर में दो तेल टैंकरों पर हूती का हमला
उधर, यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में समुद्री नाकेबंदी की घोषणा के बाद सऊदी अरब के तट के पास दो तेल टैंकरों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला करने की जिम्मेदारी ली है।
ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO के अनुसार, एक टैंकर पर हमले के बाद जहाज में आग लग गई, जिसे बुझाने के लिए चालक दल ने तत्काल प्रयास शुरू किए। यह घटना सऊदी अरब के अल-शुकैक तट से करीब 70 नॉटिकल मील दूर हुई।
हूती विद्रोहियों ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को चेतावनी दी है कि यदि वे सऊदी बंदरगाहों का इस्तेमाल करेंगी तो उनके जहाज भी निशाने पर हो सकते हैं।
ट्रंप की चेतावनी- ‘हूती से निपटेंगे‘
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हूती विद्रोहियों की धमकी पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि उन्होंने सऊदी बंदरगाहों की घेराबंदी की कोशिश की तो अमेरिका उनसे सख्ती से निपटेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि समुद्री व्यापार बाधित करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
Middle East Crisis के बीच अमेरिका और सऊदी अरब ने नागरिक परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत सऊदी अरब को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) कार्यक्रम विकसित करने की अनुमति मिलेगी।
अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच दशकों तक चलने वाली रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी की नींव रखेगा। हालांकि, यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अमेरिका और ईरान के बीच टकराव चरम पर है, इसलिए इसे क्षेत्रीय राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
बढ़ता तनाव, वैश्विक चिंता
ईरान पर अमेरिकी हमले, लाल सागर में हूती विद्रोहियों की कार्रवाई और सऊदी अरब के साथ अमेरिका की परमाणु डील ने मिडिल ईस्ट में तनाव (Middle East Crisis) को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर भी पड़ सकता है।
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