ओडिशा में मोहन माझी सरकार का ‘ऐतिहासिक’ दांव, SC-ST आरक्षण हुआ दोगुना

Sandesh Wahak Digital Desk: ओडिशा की भाजपा सरकार ने राज्य की शैक्षणिक व्यवस्था में दशकों पुरानी आरक्षण प्रणाली को बदलकर एक बड़ा धमाका कर दिया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में शनिवार देर रात हुई कैबिनेट बैठक में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग (SEBC) के लिए आरक्षण की सीमा में भारी बढ़ोतरी का फैसला लिया गया है। इस कदम को राज्य की राजनीति में भाजपा का ‘मास्टरस्ट्रोक’ माना जा रहा है।

दशकों पुराना सिस्टम बदला: आबादी के अनुपात में मिला हक

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि अब तक इन समुदायों को उनकी आबादी के मुकाबले बहुत कम सीटें मिल रही थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य था। खास बात यह है कि इन बदलावों के बावजूद सरकार ने कुल आरक्षित सीटों को 50% की सीमा के भीतर ही रखा है, ताकि कोई कानूनी अड़चन न आए।

आरक्षण का नया गणित

समुदाय पुराना आरक्षण नया आरक्षण
अनुसूचित जनजाति (ST) 12% 22.50%
अनुसूचित जाति (SC) 8% 16.25%
पिछड़ा वर्ग (SEBC) 0% 11.25%

मेडिकल और इंजीनियरिंग के छात्रों को बंपर फायदा

नए नियमों का सबसे सीधा असर उन छात्रों पर पड़ेगा जो डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना देख रहे हैं।

1. मेडिकल सीटें (UG/PG कुल 2,421)

  • ST छात्र: सीटें 290 से बढ़कर 545 हो जाएंगी।

  • SC छात्र: सीटें 193 से बढ़कर 393 हो जाएंगी।

  • SEBC छात्र: पहली बार 272 सीटें सुरक्षित होंगी।

2. इंजीनियरिंग सीटें (कुल 44,579)

  • ST छात्र: सीटें 5,349 से बढ़कर 10,030 मिलेंगी।

  • SC छात्र: सीटें 3,566 से बढ़कर 7,244 मिलेंगी।

  • SEBC छात्र: अब 5,015 सीटें आरक्षित होंगी।


इन कोर्स पर लागू होगी नई व्यवस्था

यह नीति राज्य के सभी विश्वविद्यालयों, सरकारी संस्थानों (ITIs) और पॉलिटेक्निक कॉलेजों पर लागू होगी। इसके दायरे में निम्नलिखित विषय आएंगे:

  • मेडिसिन, सर्जरी, डेंटल, नर्सिंग और फार्मेसी।

  • मैनेजमेंट, कंप्यूटर एप्लीकेशन (MCA) और आर्किटेक्चर।

  • पशु चिकित्सा, आयुर्वेद, होम्योपैथी और कृषि विज्ञान।

राजनीतिक मायने: पिछड़ों और आदिवासियों पर भाजपा की नजर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि SEBC (Socially and Educationally Backward Classes) को पहली बार आरक्षण देकर भाजपा ने राज्य के एक बहुत बड़े वोट बैंक को अपनी ओर खींचने की कोशिश की है। ST और SC कोटे में भारी वृद्धि के जरिए पार्टी ने खुद को ‘सामाजिक न्याय’ का असली ध्वजवाहक साबित करने का प्रयास किया है, जो आगामी चुनावों में गेमचेंजर साबित हो सकता है।

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