LPG और PNG उपभोक्ताओं के लिए नया नियम लागू, 30 दिन के भीतर सरेंडर करना होगा गैस कनेक्शन
Sandesh Wahak Digital Desk : घरेलू गैस उपभोक्ताओं के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा बदलाव लागू किया है। नए नियमों के तहत जिन उपभोक्ताओं के पास एक ही पते पर एलपीजी (LPG) और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) दोनों कनेक्शन हैं, उन्हें पीएनजी कनेक्शन मिलने के 30 दिनों के भीतर अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा। नियम का पालन नहीं करने पर एलपीजी कनेक्शन रद्द किया जा सकता है।
सरकार ने हाल ही में LPG (Regulation of Supply and Distribution) Amendment Order, 2026 में संशोधन किया है। इसके बाद इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस जैसी तेल विपणन कंपनियों ने भी नए नियमों को लागू करना शुरू कर दिया है। नए प्रावधान का उद्देश्य उन इलाकों में दोहरे गैस कनेक्शन की व्यवस्था समाप्त करना है, जहां पीएनजी नेटवर्क उपलब्ध है।
पीएनजी लेने के बाद 30 दिन की समय सीमा
नियम के अनुसार, यदि किसी उपभोक्ता ने अपने घर में पीएनजी कनेक्शन ले लिया है और उसके क्षेत्र में पाइप्ड गैस की नियमित आपूर्ति शुरू हो चुकी है, तो उसे 30 दिनों के भीतर अपना एलपीजी कनेक्शन समाप्त करना होगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति ने 6 जून को पीएनजी कनेक्शन लिया है, तो उसे 6 जुलाई तक एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा।
सरकार का मानना है कि बड़ी संख्या में परिवार पीएनजी कनेक्शन लेने के बाद भी एलपीजी सिलेंडर का उपयोग जारी रखे हुए हैं। इससे गैस वितरण व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और सब्सिडी प्रबंधन भी प्रभावित होता है।
सरेंडर करने पर मिलेगा ट्रांसफर वाउचर
हालांकि सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत भी दी है। एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करने वाले उपभोक्ताओं को एक ट्रांसफर वाउचर दिया जाएगा। यदि भविष्य में वे किसी ऐसे क्षेत्र में स्थानांतरित होते हैं जहां पीएनजी सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो इसी वाउचर के आधार पर दोबारा एलपीजी कनेक्शन प्राप्त कर सकेंगे।
यह व्यवस्था विशेष रूप से नौकरीपेशा लोगों, किरायेदारों और दूसरे शहरों में स्थानांतरित होने वाले परिवारों के लिए लाभदायक मानी जा रही है।
सिलेंडर बुकिंग नियम भी हुए सख्त
सरकार ने एलपीजी बुकिंग प्रक्रिया को भी पहले के मुकाबले अधिक सख्त बना दिया है। अब कई स्थानों पर गैस सिलेंडर बुकिंग के लिए पंजीकृत मोबाइल नंबर और ओटीपी सत्यापन अनिवार्य किया जा रहा है।
इसके अलावा एलपीजी और पीएनजी उपभोक्ताओं के डाटाबेस को आपस में जोड़ने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है, जिससे दोहरे कनेक्शन रखने वाले उपभोक्ताओं की पहचान की जा सके।

