UP News: अरबों की ठगी का चोखा धंधा ऑनलाइन गेमिंग एप, विदेश में बैठे हैं आका

बैंक अफसरों की भूमिका संदिग्ध, आतंकियों के लिए जासूसी भी शुरू

Sandesh Wahak Digital Desk: प्रदेश में ऑनलाइन गेमिंग एप और डिजिटल सट्टे के जरिये अरबों की ठगी के मामलों की रफ्तार तेजी से बढ़ी है। कानपुर में सामने आया ऑनलाइन गेमिंग एप के जरिये सौ करोड़ के संदिग्ध लेनदेन का यह पहला मामला नहीं है।

बीते कुछ माह के दौरान कई शहरों में ऐसे मामले लगभग रोजाना आ रहे हैं। साइबर ठगी के असली आका भले विदेशों में बैठे हैं। लेकिन हड़पे जा रहे अरबों रुपए यूपी के बैंक अफसरों की मदद से संदिग्ध खातों में जमा हो रहे हैं। एजेंसियों की पुख्ता नजर अभी बैंकों पर नहीं है। अब ऑनलाइन गेमिंग एप के सहारे आतंकियों के लिए देश के अतिसंवेदनशील क्षेत्रों की जासूसी भी शुरू हो गयी है।

दो आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार

कुछ दिनों पहले गाजियाबाद में पाकिस्तान के आतंकियों के लिए जासूसी करने वाले तीन युवक गिरफ्तार हुए। आरोपी हैंडलर्स से मोबाइल गेमिंग एप के चैट फीचर के जरिये संपर्क में थे। इसके जरिए ही संवेदनशील ठिकानों की रेकी करने के निर्देश मिलते थे। चंद दिनों पहले बरेली में भी दो आरोपी ऑनलाइन गेमिंग एप की ठगी के मामले में गिरफ्तार हुए। 50 से अधिक खातों में करोड़ों रुपए ट्रासंफर किये गए।

दो वर्षों के दौरान 15 राज्यों के लोगों को ठगा गया। जनवरी में नोएडा से गिरफ्तार आठ लोगों ने ‘मजाबुक’ और ‘मजे से जीतो’ वेबसाइट बनाकर गेमिंग एप के जरिये अरबों की कमाई कर डाली। इनके पास से 155 से ज्यादा सिमकार्ड मिलना दिखाता है कि रैकेट बेहद सुनियोजित है। बिना यूपी के बैंक अफसरों के सहयोग के ऑनलाइन ठगी का यह धंधा कतई चल नहीं सकता।

तभी गोरखपुर में जनवरी में आईडीएफसी फस्र्ट बैंक के मैनेजर की मिलीभगत ऑनलाइन गेमिंग एप से जुड़ी साइबर ठगी में सामने आयी। बंद खाते भी खोलकर ठगी से आ रहे करोड़ों रुपए जमा कराये जा रहे थे। हाल ही में भारत सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग एप और सट्टे से जुड़ी 300 से अधिक वेबसाइट-एप पर ताला लगाया है। इसके बावजूद ऑनलाइन गेमिंग एप जैसी साइबर ठगी बदस्तूर जारी है।

कानपुर: आठ गिरफ्तार, तीन माह में 100 करोड़ झटके

कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने सोमवार को प्रतिबंधित ऑनलाइन गेमिंग एप के जरिए तीन माह में 100 करोड़ की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेजा है। गिरोह के सरगना दुबई, कंबोडिया और थाईलैंड से सिंडिकेट को कंट्रोल कर रहे थे। नेटवर्क 400 लोगों का था। लोगों को फंसाने के लिए डार्क वेब और टेलीग्राम का इस्तेमाल होता था। लोकेशन ट्रेस न हो, इसके लिए ओला कैब में बैठकर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन व कैश निकासी होती थी। जांच में सैकड़ों संदिग्ध खातों की जानकारी मिली है।

Also Read: Noida Protest: श्रमिकों के समर्थन में उतरे राहुल गांधी, बोले- यही है विकसित भारत का सच

Get real time updates directly on you device, subscribe now.