Noida Protest: श्रमिकों के समर्थन में उतरे राहुल गांधी, बोले- यही है विकसित भारत का सच

Sandesh Wahak Digital Desk: गौतमबुद्धनगर (नोएडा) में वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर कर्मचारियों का प्रदर्शन अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इसी कड़ी में मंगलवार को कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मामले में सीधे पीएम मोदी और भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला।

‘मजदूर हक मांगे तो मिलता है अत्याचार’

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट साझा करते हुए नोएडा के श्रमिकों की आर्थिक स्थिति का कच्चा चिट्ठा खोला। उन्होंने कहा “एक मजदूर की ₹12,000 महीने की तनख्वाह है, जिसमें से ₹4,000-7,000 किराया निकल जाता है। सालाना ₹300 की बढ़ोतरी होती है, तो मकान मालिक किराया ₹500 बढ़ा देता है। यह कर्ज का दलदल ही विकसित भारत का सच है।”

राहुल ने एक महिला कर्मचारी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि महंगाई के इस दौर में मजदूरों ने घर का चूल्हा जलाने के लिए ₹5000 तक में सिलेंडर खरीदा होगा, लेकिन उनकी तनख्वाह नहीं बढ़ी।

श्रम कानूनों पर उठाया सवाल: ’12 घंटे काम और फिर भी कर्ज’

राहुल गांधी ने नवंबर 2025 में लागू किए गए चार नए श्रम कानूनों को लेकर मोदी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा “सरकार ने बिना संवाद के काम के घंटे बढ़ाकर 12 घंटे कर दिए। जो मजदूर 12-12 घंटे खड़े होकर काम करता है और फिर भी बच्चों की फीस कर्ज लेकर भरता है, क्या उसकी ₹20,000 वेतन की मांग गैरवाजिब है?”

‘मित्रों’ पर नहीं, दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ी वैश्विक मार

पश्चिम एशिया के युद्ध और टूटती सप्लाई चेन का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा कि वैश्विक महंगाई और टैरिफ वॉर का बोझ प्रधानमंत्री के ‘मित्र उद्योगपतियों’ पर नहीं पड़ा, बल्कि इसकी सबसे बड़ी मार उस गरीब मजदूर पर पड़ी है जो रोज कमाता और रोज खाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नोएडा का मजदूर जो ₹20,000 मांग रहा है, वह लालच नहीं बल्कि उसका अधिकार है।

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