60 लाख की आबादी पर सिर्फ 8 फायर स्टेशन, लखनऊ में फायर सेफ्टी का डरावना सच

Lucknow News: दिल्ली के एक होटल में आग लगने से हुई मौतों ने देशभर में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच राजधानी लखनऊ की स्थिति भी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। शहर में हजारों होटल, रेस्टोरेंट और बहुमंजिला इमारतें संचालित हो रही हैं, लेकिन आग लगने की स्थिति में बचाव के लिए जरूरी संसाधनों की भारी कमी है।

जानकारी के मुताबिक लखनऊ में तीन हजार से अधिक होटल और रेस्टोरेंट संचालित हैं। इनमें से बड़ी संख्या में अग्निशमन सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा है। कई प्रतिष्ठान बिना जरूरी एनओसी के चल रहे हैं, जबकि सैकड़ों भवन ऐसे बताए जा रहे हैं जहां आग लगने पर बड़ा हादसा हो सकता है।

चारबाग के होटल सबसे ज्यादा चिंता का कारण

शहर के चारबाग इलाके को अग्नि सुरक्षा के लिहाज से सबसे संवेदनशील माना जा रहा है। यहां बेहद कम जगह में कई मंजिला होटल संचालित हो रहे हैं। कई भवनों में प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही रास्ता है। संकरी सीढ़ियां और वेंटिलेशन की कमी किसी भी आपात स्थिति को और खतरनाक बना सकती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई होटलों में अग्निशमन उपकरण तो लगे हैं, लेकिन उनकी स्थिति और उपयोगिता पर सवाल उठते रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे इलाकों में आग लगने पर राहत और बचाव कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं।

ऊंची इमारतें बढ़ीं, लेकिन संसाधन नहीं

Lucknow Fire Safety से जुड़ी सबसे बड़ी चिंता बहुमंजिला इमारतों को लेकर है। शहर में लगातार ऊंची इमारतों का निर्माण हो रहा है, लेकिन आग लगने पर ऊपरी मंजिलों तक पहुंचने के लिए फायर विभाग के पास अभी हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म उपलब्ध नहीं है।

प्रदेश के कई बड़े शहरों में ऐसे प्लेटफॉर्म खरीदने की योजना बनाई गई है। लखनऊ के लिए 90 मीटर ऊंचाई वाले दो हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म प्रस्तावित हैं, जिन पर लगभग 68 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। हालांकि फिलहाल इनके लिए धनराशि की व्यवस्था पूरी नहीं हो सकी है।

जरूरत 30 फायर स्टेशनों की, मौजूद सिर्फ 8

60 लाख की आबादी पर सिर्फ 8 फायर स्टेशन, लखनऊ में फायर सेफ्टी का डरावना सच

राष्ट्रीय भवन निर्माण संहिता (NBC) के मानकों के अनुसार लखनऊ जैसे बड़े शहर में करीब 30 फायर स्टेशन होने चाहिए। लेकिन वर्तमान में शहर में केवल 8 फायर स्टेशन ही संचालित हैं।

करीब 60 लाख आबादी वाले शहर में सीमित संसाधनों के बीच फायर विभाग के कर्मचारी लगातार सेवाएं दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी और तेजी से हो रहे शहरी विस्तार को देखते हुए अग्निशमन व्यवस्था को और मजबूत बनाने की जरूरत है।

अग्नि सुरक्षा को लेकर उठ रहे ये सवाल केवल सरकारी व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि होटल, रेस्टोरेंट और बहुमंजिला इमारतों के संचालकों की जिम्मेदारी भी तय करते हैं। समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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