पार्श्व गायिका एस. जानकी अम्मा का निधन, पीएम मोदी ने जताया गहरा दुख
Sandesh Wahak Digital Desk: भारतीय संगीत जगत की कालजयी और दिग्गज पार्श्व गायिका एस. जानकी अम्मा का 88 वर्ष की आयु में शनिवार को कर्नाटक के मैसूर स्थित एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन की जानकारी उनकी पोती अप्सरा वैदुला ने सोशल मीडिया के जरिए साझा की। दक्षिण की कोकिला के नाम से मशहूर जानकी अम्मा के देहावसान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शोक संदेश पोस्ट कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। पीएम मोदी ने इसे कला और संस्कृति की दुनिया के लिए एक कभी न पूरी होने वाली क्षति बताया।
आने वाली पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध करती रहेगी उनकी आवाज: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शोक संदेश में लिखा, मशहूर पार्श्व गायिका एस. जानकी अम्मा का जाना संगीत और संस्कृति की दुनिया के लिए एक अपूरणीय क्षति है। विभिन्न भारतीय भाषाओं में गाए गए उनके गीत कई पीढ़ियों के दिलों में बसे हुए हैं। उन्होंने अद्वितीय सुंदरता और विविधता के साथ मानवीय संवेदनाओं और हर भावना को अपने सुरों से जीवंत किया। उनकी जादुई और मधुर आवाज आने वाले अनगिनत वर्षों तक संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध करती रहेगी। दुःख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, देश-विदेश में फैले प्रशंसकों और पूरे संगीत जगत के साथ हैं। ओम शांति।
48,000 गानों का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
1. 20 भाषाओं में बिखेरा सुरों का जादू
एस. जानकी भारतीय संगीत इतिहास की सबसे प्रभावशाली और सर्वाधिक गीत रिकॉर्ड करने वाली प्लेबैक सिंगर्स में शुमार हैं। उन्होंने अपने छह दशक से लंबे करियर में कन्नड़, तमिल, तेलुगु, मलयालम और हिंदी सहित करीब 20 क्षेत्रीय भाषाओं में 48,000 से ज्यादा गानों को अपनी आवाज दी। उन्होंने अपने करियर में सबसे ज्यादा गाने कन्नड़ भाषा में गाए, जिसके बाद मलयालम गानों का नंबर आता है।
2. 1957 में छह भाषाओं के साथ किया था डेब्यू
जानकी अम्मा ने संगीत की दुनिया में अपना पहला कदम वर्ष 1957 में तमिल फिल्म ‘विधियिन विलायट्टू’ से रखा था। इसी वर्ष उन्होंने मलयालम सिनेमा में भी एंट्री की। अपने करियर के पहले ही साल में उन्होंने छह अलग-अलग भाषाओं में गाने गाकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया था, जो भारतीय संगीत जगत में एक ऐतिहासिक शुरुआत थी।
3. मलयालम सिनेमा में रहा एकछत्र राज और मिले ढेरों पुरस्कार
1970 के दशक से वे मलयालम फिल्म इंडस्ट्री की सबसे प्रमुख और लोकप्रिय महिला आवाज बन गईं। उन्होंने उस दौर के तमाम बड़े संगीत निर्देशकों के साथ काम किया और सदाबहार गाने दिए। वर्ष 1970 में उन्होंने सर्वश्रेष्ठ गायिका का अपना पहला ‘केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड’ जीता और इसके बाद अगले 15 वर्षों तक इस श्रेणी में उनका दबदबा कायम रहा। 1957 से लेकर 2017 (अपने संन्यास) तक के शानदार सफर में उन्होंने 4 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और अलग-अलग राज्यों के 33 राज्य फिल्म पुरस्कार अपने नाम किए।
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