आगरा में नकली दवा सिंडिकेट पर योगी सरकार का शिकंजा, 13 फर्मों पर छापे, 3.63 करोड़ की दवाएं जब्त
Agra News: उत्तर प्रदेश में नकली और अवैध दवा कारोबार के खिलाफ योगी सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए आगरा में करोड़ों रुपये के संगठित दवा सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की टीम ने एक साथ 13 दवा फर्मों पर छापेमारी कर नकली दवाओं, सरकारी अस्पतालों की जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी, फर्जी बिलिंग, री-लेबलिंग और अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा किया है। कार्रवाई के दौरान अब तक ₹3.63 करोड़ की दवाएं जब्त, 58 थोक लाइसेंस निरस्त या निलंबित किए जा चुके हैं और पूरे अभियान में 9 एफआईआर दर्ज होने की स्थिति बन गई है।
13 फर्मों पर एक साथ छापे
एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के नेतृत्व में 15 ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम ने आगरा के अलग-अलग इलाकों में एक साथ कार्रवाई की। इस दौरान 13 दवा फर्मों की जांच की गई। दो प्रतिष्ठानों को सील कर दिया गया, जबकि कई अन्य पर कानूनी कार्रवाई करते हुए 35 संदिग्ध दवाओं के नमूने जांच के लिए लैब भेजे गए।
ऐसे खुला करोड़ों के नकली दवा नेटवर्क का राज
जांच की शुरुआत टोरेंट फार्मास्यूटिकल्स की Chymoral Forte और Shelcal दवाओं के नकली होने की शिकायत से हुई। जांच आगे बढ़ी तो फर्जी खरीद बिल, बिना बिल दवाओं की खरीद-बिक्री और आगरा, गोरखपुर, कोलकाता समेत कई राज्यों तक फैला नेटवर्क सामने आया। जांच में सरकारी और अस्पतालों की सप्लाई वाली दवाओं पर लगे ‘Not for Sale’ टैग हटाकर नई पैकिंग और एमआरपी के साथ बाजार में बेचने का भी खुलासा हुआ।
एफएसडीए के मुताबिक, कई आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में नई एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
री-लेबलिंग, फर्जी बिलिंग और सरकारी दवाओं की कालाबाजारी
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ फर्मों में इंसुलिन समेत अन्य दवाओं का कोल्ड-चेन नियमों के विपरीत भंडारण किया जा रहा था। वहीं, फर्जी बिलिंग, नकली दवाओं की सप्लाई और री-लेबलिंग के जरिए करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार संचालित किया जा रहा था। सीसीटीवी फुटेज और दस्तावेजों के आधार पर कई अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है।
FSDA का कहना है कि यह कार्रवाई केवल नकली दवाएं पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे आर्थिक और आपराधिक नेटवर्क को खत्म करने के उद्देश्य से की जा रही है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि दवा व्यापारियों से अवैध वसूली की शिकायतें सही पाई गईं तो संबंधित लोगों के खिलाफ रंगदारी (Extortion) के मुकदमे भी दर्ज किए जाएंगे।
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