प्रो. सीमा अलवी ब्रिटिश अकादमी की चुनी गईं इन्टरनेशनल फेलो, मौलाना आज़ाद मेमोरियल अकादमी ने दी बधाई
Lucknow News: अशोका विश्वविद्यालय की प्रख्यात इतिहासकार और प्रसिद्ध शिक्षाविद् प्रोफेसर सीमा अलवी को वर्ष 2026 के लिए ब्रिटिश अकादमी का इन्टरनेशनल फेलो चुना गया है। इस सर्वोच्च वैश्विक सम्मान पर मौलाना आज़ाद मेमोरियल अकादमी (लखनऊ) के अध्यक्ष शारिक अलवी तथा महासचिव डॉ. अब्दुल कुद्दूस हाशमी ने गहरी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई दी है।
गौरतलब है कि प्रोफेसर सीमा अलवी, अकादमी के अध्यक्ष शारिक अलवी की सुपुत्री हैं। डॉ. हाशमी ने अपने बधाई संदेश में कहा कि यह सम्मान न केवल प्रोफेसर सीमा की असाधारण शोधपरक उपलब्धियों का प्रमाण है, बल्कि यह भारतीय इतिहास लेखन, लखनऊ की समृद्ध बौद्धिक विरासत और देश के संपूर्ण अकादमिक जगत के लिए एक गौरवशाली क्षण है।
कई शीर्ष विश्वविद्यालयों में दे चुकी हैं सेवाएँ
प्रोफेसर सीमा अलवी ने दुनिया के प्रतिष्ठित कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री हासिल की है। वह पिछले तीन दशकों से दक्षिण एशिया के इतिहास, औपनिवेशिक भारत, इंडो-फ़ारसी सांस्कृतिक विरासत, हिंद महासागर क्षेत्र के साथ-साथ सैन्य, चिकित्सा और धार्मिक इतिहास पर निरंतर उल्लेखनीय शोध कर रही हैं। अशोका विश्वविद्यालय में शामिल होने से पहले उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, जामिया मिल्लिया इस्लामिया और दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे देश के शीर्ष संस्थानों में अध्यापन और शोध कार्य किया है, जहाँ उन्होंने इतिहासकारों की कई पीढ़ियों को तैयार किया है।

विश्वविद्यालयों में संदर्भ ग्रंथ के रूप में पढ़ी जाती हैं प्रो. सीमा की किताबें
प्रोफेसर सीमा अलवी की लेखनी और शोध को वैश्विक स्तर पर सराहा गया है। उनकी बेहद चर्चित पुस्तक “Muslim Cosmopolitanism in the Age of Empire” को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘अल्बर्ट हौरानी अवॉर्ड’ (ऑनरेबल मेंशन) और ‘मॉनसून बुक प्राइज़’ से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा उनकी नई किताब “Sovereigns of the Sea: Omani Ambition in the Age of Empire” को हिंद महासागर के इतिहास पर एक बेजोड़ शोधग्रंथ माना जा रहा है। उनकी अन्य कालजयी कृतियाँ जैसे “Sepoys and the Company”, “Islam and Healing” और “Eighteenth Century in Indian History” दुनिया भर के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में संदर्भ ग्रंथ (रेफरेंस बुक) के रूप में पढ़ाई जाती हैं।
हार्वर्ड और कैम्ब्रिज में रह चुकी हैं फेलो
शैक्षणिक क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाली प्रोफेसर सीमा अलवी दो बार ‘फुलब्राइट स्कॉलर’ रहने का गौरव प्राप्त कर चुकी हैं। इसके अलावा वह कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में ‘स्मट्स विज़िटिंग फेलो’, हार्वर्ड-येनचिंग इंस्टीट्यूट में ‘विज़िटिंग स्कॉलर’ तथा हार्वर्ड विश्वविद्यालय के रैडक्लिफ इंस्टीट्यूट में ‘विलियम बेंटिंक-स्मिथ फेलो’ भी रह चुकी हैं। वर्तमान में वे कई अंतरराष्ट्रीय शोध-पत्रिकाओं के संपादकीय बोर्ड का हिस्सा हैं। डॉ. हाशमी ने कहा कि ब्रिटिश अकादमी की फेलोशिप मिलना मानविकी और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया का सबसे बड़ा सम्मान है। उनकी यह सफलता निश्चित रूप से देश के युवा शोधार्थियों, विशेष रूप से छात्राओं को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए प्रेरित करेगी।
Also Read: गाँधी के विचार आज भी लोकतंत्र और सामाजिक सौहार्द की सबसे बड़ी ताकत: अशोक पाण्डेय

