लखनऊ से उज्जैन तक नकली दवा का नेटवर्क, आयुर्वेदिक लाइसेंस की आड़ में बन रही थी LEVERA-500
Lucknow News: उत्तर प्रदेश में नकली और अवैध दवाओं के खिलाफ चल रही कार्रवाई दूसरे राज्यों तक पहुंच गई है। लखनऊ के अमीनाबाद थाने में 12 अगस्त 2026 को दर्ज केस की जांच में यूपी एफएसडीए और पुलिस की टीम उज्जैन पहुंची। मध्य प्रदेश के औषधि प्रशासन, आयुष विभाग और पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई में अंतर्राज्यीय नकली दवा नेटवर्क का खुलासा हुआ।
इस मामले में अंकुर अवस्थी, मनीष बाजपेयी, गोविंद शुक्ला और सहारनपुर के एजाज अहमद पर केस दर्ज है। मनीष, गोविंद और एजाज गिरफ्तार हो चुके हैं। एजाज से पूछताछ के बाद जांच की कड़ी उज्जैन तक पहुंची।
आयुर्वेदिक लाइसेंस की आड़ में एलोपैथिक दवा
टीम ने ए-88, न्यू इंडस्ट्रियल एरिया, आगर रोड स्थित रुद्राया फार्मा पर छापा मारा। यहां संचालक प्रेम मलिक और उसका बेटा राहुल मलिक उर्फ रितिक मिला। जांच में फर्म के पास केवल आयुर्वेदिक दवाओं का लाइसेंस मिला, जबकि वहां LEVERA-500 का निर्माण किया जा रहा था।
पूछताछ में प्रेम मलिक ने बताया कि वह एजाज अहमद से 8 से 10 साल से जुड़ा था। Levetiracetam IP मुंबई की फर्मों से मंगाकर टैबलेट बनाई जाती थीं। करीब 4.80 लाख टैबलेट यानी 32 हजार स्ट्रिप्स प्राइवेट बसों से हरिद्वार भेजने की बात सामने आई है।
5,250 संदिग्ध वायल भी मिलीं
एफआईआर की जानकारी के बाद दवाएं, पैकिंग सामग्री, चेंज पार्ट्स और डाई-पंच नष्ट करने तथा Alu-Alu पैकिंग मशीन देवास में छिपाने की बात भी सामने आई। फैक्ट्री की छत से 5,250 बिना लेबल वाली ग्लास वायल मिलीं, जिन्हें सात कार्टन में सील किया गया। आठ आयुर्वेदिक दवाओं के नमूने लिए गए और संदिग्ध वायल जांच के लिए राजकीय प्रयोगशाला भेजी गईं।
टीम ने बिल, इनवॉइस और मोबाइल स्क्रीनशॉट समेत साक्ष्य सुरक्षित किए। प्रेम मलिक से वैधानिक अंडरटेकिंग ली गई और उसे अमीनाबाद FIR में नामजद करने के निर्देश दिए गए। एफएसडीए अब निर्माण से लेकर भुगतान और सप्लाई तक पूरी चेन की जांच कर रहा है।

