गाजा के बहाने सोनिया गांधी ने केंद्र पर बोला तीखा हमला, कहा- भारत ने कूटनीतिक साख गंवाई
Sandesh Wahak Digital Desk: कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गाजा पट्टी में जारी सैन्य संघर्ष को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की विदेश नीति पर कड़ा प्रहार किया है। शनिवार को प्रकाशित अपने एक विशेष लेख में सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि गाजा और वेस्ट बैंक के हालात पर भारत सरकार की खामोशी और अकर्मण्यता न केवल नैतिक रूप से अनुचित है, बल्कि यह देश के रणनीतिक और राष्ट्रीय हितों को भी गहरी चोट पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा नीति के चलते भारत ने फिलिस्तीन, ईरान और समूचे पश्चिम एशिया के अपने पुराने व विश्वसनीय मित्रों से दूरी बना ली है, जिसका फायदा उठाकर पाकिस्तान इस क्षेत्र में खुद को एक मध्यस्थ के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।
सोनिया गांधी ने संयुक्त राष्ट्र और न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एस. मुरलीधर की अध्यक्षता वाले आयोगों की हालिया रिपोर्टों (सितंबर 2025 और जून 2026) का हवाला देते हुए गाजा के हालातों को बेहद खौफनाक बताया। उन्होंने लिखा कि इस इजरायली सैन्य अभियान में अब तक कम से कम 20 हजार से ज्यादा मासूम बच्चों की जान जा चुकी है और 44 हजार से अधिक बच्चे स्थायी रूप से दिव्यांग हो चुके हैं। अस्पतालों पर हुए हमलों की वजह से वहां प्रसव संबंधी जटिलताएं 300 फीसदी तक बढ़ गई हैं। हालांकि, कांग्रेस नेता ने 7 अक्टूबर को इजरायल पर हुए हमास के हमले को भयावह और पूरी तरह अस्वीकार्य बताया, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इसके बाद बीते ढाई वर्षों में इजरायल द्वारा की गई जवाबी सैन्य कार्रवाई पूरी तरह क्रूर, अमानवीय और नरसंहार जैसी है।
वैश्विक रुख से अलग-थलग पड़ रहा है भारत
अपने लेख में सोनिया गांधी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की भी आलोचना की, जिसके एकतरफा समर्थन के कारण संयुक्त राष्ट्र इजरायल के खिलाफ कोई प्रभावी कदम नहीं उठा सका। उन्होंने ध्यान दिलाया कि आज फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने फिलिस्तीन को मान्यता दी है, दक्षिण अफ्रीका इजरायल को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में घसीट चुका है और कई यूरोपीय देशों ने इजरायल को हथियारों की सप्लाई रोक दी है। अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय ने इजरायली नेतृत्व के खिलाफ वारंट तक जारी किए हैं। ऐसे समय में जब दुनिया का एक बड़ा हिस्सा इजरायल से दूरी बना रहा है, भारत का उसके और करीब जाना रणनीतिक रूप से हैरान करने वाला फैसला है।
सोनिया गांधी ने दुख जताते हुए कहा कि उपनिवेशवाद का विरोध करने वाला और हमेशा वैश्विक शांति का झंडा बुलंद करने वाला भारत आज मानवाधिकारों के खुले उल्लंघन पर चुप बैठा है। उन्होंने लेख के समापन पर तंज कसते हुए कहा कि भारत की पारंपरिक और समय की कसौटी पर खरी उतरी विदेश नीति में किए गए इस बड़े बदलाव का सीधा फायदा केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की व्यक्तिगत घनिष्ठता को मिल रहा है, जबकि इसके बदले में भारत ने अपनी वैश्विक, नैतिक और कूटनीतिक साख को दांव पर लगा दिया है।
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