होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकर पर ड्रोन हमले के बाद अमेरिका ने ईरान के 10 ठिकानों को बनाया निशाना
Sandesh Wahak Digital Desk: पश्चिम एशिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग होर्मुज स्ट्रेट में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सीईएनटीसीओएम) के मुताबिक, ईरान द्वारा एक कमर्शियल ऑयल टैंकर पर ताजा ड्रोन हमला किए जाने के बाद अमेरिका ने शनिवार को ईरानी सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। इससे पहले अमेरिका ने ईरान पर ‘एम/वी एवर लवली’ नाम के व्यावसायिक जहाज पर हमले का आरोप लगाते हुए जवाबी कार्रवाई की थी। इस जवाबी कार्रवाई के बाद अब ईरान की ओर से एक और कथित ड्रोन हमले की बात सामने आई है, जिसने दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव को और बढ़ा दिया है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान को युद्धविराम समझौते का पालन करने का पूरा अवसर दिया गया था, लेकिन उसने दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री ऊर्जा गलियारे से गुजर रहे एक टैंकर को निशाना बनाकर स्थिति को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी एक आधिकारिक बयान में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि कमांडर-इन-चीफ के निर्देश पर 27 जून को ईरान के भीतर कई सैन्य लक्ष्यों पर नए हमले किए गए हैं।
पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर को बनाया निशाना
कमांड के अनुसार, शुक्रवार को हुई अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान के पास सीजफायर के नियमों को मानने का मौका था। लेकिन, तेहरान ने इस समझौते का सम्मान नहीं किया और भारतीय समयानुसार सुबह करीब 4:30 बजे एम/टी किकू नामक तेल टैंकर पर एकतरफा हमला करने वाला ड्रोन दागा। हमले के वक्त पनामा के ध्वज वाला यह टैंकर करीब दो मिलियन बैरल से ज्यादा कच्चा तेल लेकर होर्मुज स्ट्रेट के करीब से गुजर रहा था।
अमेरिकी वायुसेना और नौसेना की संयुक्त कार्रवाई
इस हमले के जवाब में अमेरिकी नौसेना और वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने तत्काल एक्शन लेते हुए होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास स्थित ईरान के 10 प्रमुख सैन्य ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया। वाशिंगटन का कहना है कि इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और समुद्री व्यापार को निशाना बनाने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना है। इस भारी सैन्य हलचल के बीच भी अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज स्ट्रेट से कमर्शियल जहाजों का आवागमन बाधित नहीं हुआ है और वह लगातार जारी है। बयान के अंत में अमेरिकी सेना ने कहा कि वे किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद और तैयार हैं।
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