UP में BSP के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, कैंसर से लंबी जंग के बाद ली अंतिम सांस

Umashankar Singh Dead: उत्तर प्रदेश की राजनीति से बुधवार को एक बड़ी और भावुक खबर सामने आई। बहुजन समाज पार्टी (BSP) के इकलौते विधायक और बलिया की रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार तीन बार विधायक रहे उमाशंकर सिंह का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया।

वह पिछले करीब दो वर्षों से कैंसर से जूझ रहे थे और दिल्ली के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन से बसपा को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है, वहीं पूर्वांचल की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई है।

उमाशंकर सिंह (Umashankar Singh) सिर्फ बसपा के विधायक भर नहीं थे, बल्कि पूर्वांचल में पार्टी का सबसे मजबूत चेहरा माने जाते थे। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जब बसपा पूरे प्रदेश में सिर्फ एक सीट जीत सकी थी, तब रसड़ा से उमाशंकर सिंह ही पार्टी की इकलौती जीत बनकर उभरे थे। उनके निधन के साथ विधानसभा में बसपा की सबसे मजबूत आवाज भी खामोश हो गई।

छात्र राजनीति से विधानसभा तक का सफर

2 जनवरी 1971 को बलिया जिले के खनवर गांव के एक किसान परिवार में जन्मे Umashankar Singh ने शुरुआती शिक्षा सरकारी स्कूल से प्राप्त की। राजनीति में उनकी शुरुआत छात्र जीवन से हुई। वर्ष 1990 में वह बलिया के टीडी कॉलेज (TD College) छात्रसंघ के महामंत्री चुने गए, जिसके बाद उनका राजनीतिक सफर लगातार आगे बढ़ता गया।

साल 2000 में उन्होंने जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता और बाद में जिला पंचायत अध्यक्ष भी बने। इसके बाद उन्होंने विधानसभा की राजनीति में कदम रखा और 2012 में पहली बार बसपा के टिकट पर रसड़ा से विधायक बने। इसके बाद 2017 और 2022 में भी उन्होंने लगातार जीत दर्ज कर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ साबित की।

2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा का प्रदर्शन बेहद खराब रहा और पार्टी पूरे उत्तर प्रदेश में केवल एक सीट जीत सकी। यह सीट रसड़ा विधानसभा थी, जहां उमाशंकर सिंह ने जीत हासिल कर बसपा का खाता खोला। इसी वजह से वह विधानसभा में बसपा के इकलौते विधायक बने और पार्टी का प्रमुख चेहरा बने रहे।

Umashankar Singh का मायावती से था खास रिश्ता

उमाशंकर सिंह का बसपा सुप्रीमो मायावती से बेहद करीबी रिश्ता माना जाता था। वह उन्हें अपनी बहन मानते थे और मायावती भी उन्हें हर वर्ष राखी बांधती थीं। राजनीतिक गलियारों में उनकी पहचान एक प्रभावशाली और संगठन के प्रति समर्पित नेता के रूप में थी।

उनके संबंध भाजपा के कुछ नेताओं से भी अच्छे बताए जाते थे। उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह से उनका पारिवारिक रिश्ता भी था। दिनेश प्रताप सिंह की पुत्री का विवाह उमाशंकर सिंह के पुत्र से हुआ है।

उमाशंकर सिंह (Umashankar Singh) के निधन से बलिया ही नहीं, पूरे पूर्वांचल की राजनीति में एक बड़ा खालीपन पैदा हो गया है। समर्थकों और स्थानीय लोगों के बीच उनकी पहचान एक जनाधार वाले नेता की थी। उनके निधन के बाद बसपा के सामने संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर नई चुनौती खड़ी हो गई है।

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