रूसी कॉलेज पर हुए ड्रोन अटैक की संयुक्त राष्ट्र ने की निंदा, 18 पहुंचा मरने वालों का आंकड़ा

Sandesh Wahak Digital Desk: रूस के नियंत्रण वाले लुहांस्क क्षेत्र के स्टारोबेल्स्क शहर में स्थित एक कॉलेज हॉस्टल (डॉरमेट्री) पर हुए भीषण हमले में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 18 हो गई है। स्थानीय प्रशासन द्वारा मलबे को हटाने के दौरान कुछ और शव बरामद किए गए हैं। रूस के आपातकालीन स्थिति मंत्रालय के मुताबिक, इस तबाही के बाद घायलों की कुल संख्या 60 तक पहुंच चुकी है, जबकि मलबे के नीचे अभी भी तीन मासूम बच्चों के दबे होने की गंभीर आशंका है, जिनकी तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

यूक्रेनी ड्रोन से हुआ हमला, निशाने पर थे 86 छात्र

रूसी जांच कमेटी की प्रवक्ता स्वेतलाना पेट्रेंको ने बताया कि स्टारोबिल्स्क कॉलेज की इस इमारत पर यूक्रेन की सेना द्वारा चार फिक्स्ड-विंग यूएवी (ड्रोन) के जरिए सटीक हमला किया गया था। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे नागरिक ठिकानों पर कायराना हमला बताया है। बताया जा रहा है कि जब यह हमला हुआ, तब हॉस्टल के अंदर 14 से 18 वर्ष की आयु के लगभग 86 बच्चे मौजूद थे, जिससे इतनी बड़ी संख्या में छात्र हताहत हुए।

इस वीभत्स हमले की गूंज संयुक्त राष्ट्र (UN) में भी सुनाई दी। यूएन महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा, हम आम नागरिकों और रिहायशी बुनियादी ढांचों पर होने वाले किसी भी हमले की पुरजोर निंदा करते हैं। लुहांस्क के कॉलेज और हॉस्टल पर रातभर हुई गोलाबारी बेहद चिंताजनक है। मासूम बच्चों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का खुला उल्लंघन है।

सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक में वैनेसा फ्रेजियर ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि युद्ध के दौरान बच्चों, स्कूलों और अस्पतालों को कभी भी टारगेट नहीं किया जाना चाहिए। उनके भविष्य को इस तरह तबाह करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।

अमेरिका ने उठाई तुरंत सीजफायर की मांग

यूएन में अमेरिका की उपस्थायी प्रतिनिधि टैमी ब्रूस ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वाशिंगटन लुहांस्क से आ रही मौतों और घायलों की रिपोर्टों पर पैनी नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि हालांकि इस हमले से जुड़े कई तकनीकी सवालों के जवाब आने बाकी हैं, लेकिन अमेरिका इस खूनी जंग को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए तुरंत और पूर्ण युद्धविराम (सीजफायर) लागू करने की वकालत करता है, ताकि बातचीत का रास्ता साफ हो सके।

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