Ram Mandir Donation पर बवाल! पूर्व लेखा प्रभारी बोले- सालों से चल रहा था खेल

Ram Mandir Donation: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा मुद्दा उठाए जाने के बाद अब खुद को मंदिर का पूर्व लेखा प्रभारी बताने वाले महिपाल सिंह ने ऐसे दावे किए हैं, जिन्होंने पूरे मामले को नई दिशा दे दी है। महिपाल का कहना है कि मंदिर में चढ़ावे और दान राशि की गिनती के दौरान लंबे समय से गड़बड़ियां होती रही हैं और उन्होंने खुद इस कथित खेल को पकड़ा था।

राजस्थान के रहने वाले पूर्व बैंक अधिकारी महिपाल सिंह ने बताया कि वह जनवरी 2021 से मार्च-अप्रैल 2022 तक मंदिर में लेखा प्रभारी के रूप में कार्यरत रहे। उनके मुताबिक दान राशि की गिनती के लिए विशेष काउंटिंग रूम बनाया गया था, जहां CCTV कैमरों की निगरानी भी रहती थी। इसके बावजूद कुछ लोगों की मिलीभगत से चढ़ावे में कथित हेराफेरी की जा रही थी।

दान की गिनती में ऐसे होता था कथित खेल

महिपाल सिंह के अनुसार, Ram Mandir के Donation राशि की गिनती में बैंक कर्मचारियों और ट्रस्ट के कर्मचारियों की टीम शामिल रहती थी। नोटों की गड्डियां बनाकर उन्हें बंडल में पैक किया जाता था। आरोप है कि कई बार 10 गड्डियों की जगह 12 या 13 गड्डियां रखी जाती थीं, लेकिन रिकॉर्ड और वाउचर सिर्फ 10 गड्डियों का ही बनाया जाता था।

उन्होंने दावा किया कि एक बार शक होने पर जब एक बॉक्स की दोबारा जांच कराई गई तो उसमें करीब 5 लाख रुपये अतिरिक्त मिले। उनके अनुसार, ऐसे अतिरिक्त पैसों को बाद में बाहर निकाल लिया जाता था। महिपाल का कहना है कि उन्होंने इस मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा उन्हें ही पद से हटा दिया गया।

महिपाल ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें हटाने से पहले कई महीनों के CCTV फुटेज भी डिलीट कर दिए गए थे। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

सोना-चांदी के दान पर भी उठाए सवाल

पूर्व लेखा प्रभारी ने केवल नकद दान ही नहीं बल्कि सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुओं के दान को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि Ram Mandir में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए बहुमूल्य दान का पूरा रिकॉर्ड और रसीद व्यवस्था स्पष्ट नहीं थी।

महिपाल के मुताबिक, दान पात्रों में जमा सोना-चांदी को एक बड़े कंटेनर में इकट्ठा किया जाता था, लेकिन उसकी इंटरनल अकाउंटिंग और डॉक्यूमेंटेशन को लेकर कई सवाल थे। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जब उन्होंने जानकारी मांगी तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

पूर्व लेखा प्रभारी ने कुछ अन्य लोगों पर भी वित्तीय अनियमितताओं और कथित उगाही के आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी आधिकारिक एजेंसी या स्वतंत्र जांच से पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल मामला राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का विषय बन गया है और आरोपों की सच्चाई किसी आधिकारिक जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।

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