WPI Inflation : थोक महंगाई पहुंची 9.68% पर, अप्रैल के मुकाबले खाने-पीने का सामान हुआ और महंगा

WPI Inflation : देश में महंगाई ने एक बार फिर आम आदमी को बड़ा झटका दिया है। अगर आप सोच रहे थे कि बाजार में सामानों की कीमतें जल्द कम होंगी, तो ताजा आंकड़ों ने आपकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। मई 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित महंगाई दर बढ़कर 9.68 फीसदी पर पहुंच गई है।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2026 में यह दर 8.26 फीसदी थी। यानी महज एक महीने में थोक महंगाई में डेढ़ फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हो गई है। थोक बाजार में आई इस तेजी का असर जल्द ही खुदरा बाजार पर पड़ेगा।

ईंधन और कच्चे तेल ने लगाई आग

थोक महंगाई में इस तेजी की सबसे बड़ी वजह ईंधन, बिजली और कच्चे तेल की कीमतों में आई रिकॉर्ड बढ़ोतरी है। ईंधन और बिजली में थोक महंगाई अप्रैल के 24.89 फीसदी से बढ़कर मई में 30.33 फीसदी पर पहुंच गई। वहीं कच्चे तेल के मोर्चे पर महंगाई 61.51 फीसदी के खतरनाक स्तर पर पहुंच गई।

ईंधन की इस आग का असर सीधे रसोई के बजट पर भी पड़ा है। ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने की वजह से खाने-पीने की चीजों में थोक महंगाई मई में बढ़कर 3.60 फीसदी हो गई, जो अप्रैल में सिर्फ 2.43 फीसदी थी। इसके अलावा फैक्ट्रियों में बनने वाले सामान भी 7.48 फीसदी महंगे हो गए हैं।

क्या है बढ़ोतरी की वजह?

थोक महंगाई में यह भारी बढ़ोतरी पश्चिम एशिया के संकट और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की नाकेबंदी के कारण हुई है। इसी समुद्री रास्ते से भारत ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम बढ़ने की वजह से मई के दूसरे हिस्से में पेट्रोल और डीजल के दामों में 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी भी की गई थी।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.