शर्मनाक: नेताओं के जहरीले अल्फाज राष्ट्रनायकों को भी कर रहे ‘घायल’

Sandesh Wahak Digital Desk/Manish Srivastava: ब्रिटिश लेखक एजी गार्डिनर का निबंध है ऑन सेइंग प्लीज। इसका सार कहता है, व्यक्ति को बोलते समय बेहद संयम रखना चाहिए। शारीरिक चोट तो व्यक्ति भूल जाता है, शब्द बड़े गहरे घाव देते हैं।

इन घावों से सियासी हस्तियों को कभी सरोकार रहा ही नहीं, क्योंकि इनकी बदजुबानी अब ऐसा नासूर बन चुकी है। जिसने व्यक्तियों को छोडक़र सीधे देश और उसके नायकों को घायल करने की शर्मनाक परम्परा शुरू कर दी है। इस फेहरिस्त में नया नाम जुड़ा है मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार के डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा का। शर्मनाक शब्दों के जरिये सेना और सैनिकों की गरिमा का चीरहरण करने में देवड़ा से पहले इसी सरकार में मंत्री विजय शाह और सपा के सांसद रामगोपाल यादव भी सुर्खियां बटोर रहे हैं।

सेना को निशाना बनाने से भी तमाम दलों के नेताओं को परहेज नहीं

जातियों के खांचों में आम जनता को बांटकर सियासत करने के शौकीन नेताओं की बदजुबानी से देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे वीर सैनिक बेहद आहत हो रहे हैं। कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह पर बेहद अभद्र टिप्पणियों से किनारा करने वाले सियासी दलों ने अभी तक जिम्मेदार नेताओं पर कोई कार्रवाई नहीं की है। पहलगाम हमले के बाद भारत ने जिस अंदाज में पकिस्तान को घर में घुसकर ललकारते हुए बड़ी चोट दी, ऐसे संवेदनशील मौकों पर राष्ट्र को एकजुटता का संदेश देने के बजाय चंद नेता सिर्फ थोथी सियासत करने में जुटे हैं। पहलगाम हमले के बाद से नेताओं में राष्ट्र और उनके नायकों के खिलाफ जहर उगलने की रफ्तार तेज हुई है।

सिर्फ भाजपा और सपा ही नहीं बल्कि कांग्रेस के नेता भी इस फेहरिस्त में आगे हैं। पहलगाम आतंकी हमले पर कर्नाटक सीएम सिद्धारमैया, कांग्रेस नेता आरबी तिम्मापुर, विजय वडेट्टीवार, मणिशंकर अय्यर, तारिक हमीद कर्रा, सैफुद्दीन सोज और रॉबर्ट वाड्रा के दिए बयानों से कांग्रेस ने खुद किनारा करने में भलाई समझी। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश के मुताबिक पार्टी नेताओं के बयान उनकी निजी राय हैं। ये कांग्रेस पार्टी की लाइन नहीं है। संवेदनशील समय में नेताओं को बोलने की जरूरत नहीं है। सिर्फ देश ही नहीं बल्कि राष्ट्र के उन नायकों पर भी अपमानजनक अल्फाजों का इस्तेमाल धडल्ले से हो रहा है। जिनको पूरी दुनिया में सम्मानजनक नजरों से देखा जाता है।

साध्वी प्रज्ञा का बयान हुआ था वायरल

तभी साध्वी प्रज्ञा ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया था। जिसके बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने यहां तक कहा कि साध्वी को कभी मन से माफ नहीं कर पाएंगे। साध्वी ने मुंबई आतंकी हमले में शहीद हेमंत करकरे पर यहां तक कहा था कि मैंने श्राप दिया, इसलिए आतंकी हमले में उनकी मौत हुई। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को राष्ट्रपुत्र तक बता डाला था। वहीं शिवसेना शिंदे गुट के विधायक संजय गायकवाड़ ने कहा कि आतंकवादियों के संदेशों को समझने के लिए राज्य में उर्दू भी सिखाई जानी चाहिए।

विधायक गायकवाड़ के इस बयान ने कई लोगों को चौंका दिया। वहीं राहुल गांधी के बेहद करीबी कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने भी विवादास्पद ब्यान देते हुए कहा था कि भारत चीन को दुश्मन मानना बंद करे। चीन से खतरे को बढ़ाचढ़ा कर पेश किया जाता है। वहीं पुलवामा आतंकी हमले में 40 जवानों की शहादत पर पित्रोदा ने कहा था कि पुलवामा जैसे हमले होते रहते हैं। संवेदनशील और नाजुक मौकों पर भी सियासी नेताओं की जुबान नियंत्रण से बाहर होना उतना ही खतरनाक है। जितना पकिस्तान जैसे देश को अच्छे से सबक न सिखा पाने की मन में कसमसाहट होना।

सियासी नेताओं की बदजुबानी पर देश की शीर्ष न्यायपालिका भी बेहद सख्त

हालांकि नेता तो आदिवासी समुदाय से आने वाली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर भी जहर उगल चुके हैं। कांग्रेस सांसद अधीर रंजन ने मुर्मू को राष्ट्र पत्नी तक करार दे दिया था। जिस पर संसद के दोनों सदनों में खूब हंगामा भी हुआ। इसी तरह कांग्रेस नेता शमा मोहम्मद ने भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रोहित शर्मा को मोटा बताकर उनका सार्वजनिक अपमान किया। सियासी नेताओं की बदजुबानी पर देश की शीर्ष न्यायपालिका भी बेहद सख्त है। तभी हाईकोर्ट ने मंत्री विजय शाह के कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए बेहद घटिया बयान को गटर की भाषा करार देते हुए अफसरों को आदेश देकर तत्काल मुकदमा दर्ज करवाया। अभी तक बदजुबानी सिर्फ सियासी व्यक्तियों तक सीमित थी।

नेताओं के बिगड़े बोल बनते हैं चर्चा का विषय

चुनावी भाषणों और जनसभाओं में नेताओं के बिगड़े बोल अक्सर सुर्खियां बटोरते थे। लेकिन अब स्थितियां विस्फोटक होती जा रही हैं। ऐसे में इन जहरीले नेताओं की गिरफ्तारी तत्काल सुनिश्चित होनी चाहिए। विवाद होने पर इन नेताओं का पार्टी आलाकमान उनसे सहमत नहीं होने का बयान जारी कर देता है और मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। लेकिन सवाल तो उठेंगे ही और सवाल उठाए जाना जरूरी भी है कि आखिर कब तक नेता कटु शब्दों से चोट करते रहेंगे। वहीं पार्टियां उन नेताओं पर कार्रवाई करने की बजाए कब तक उनके बयान से सिर्फ असहमत होने का बहाना बनाती रहेगी।

एमपी के डिप्टी सीएम ने क्या कहा, जिससे मचा सियासी बवाल

जबलपुर में सिविल डिफेंस वॉलिंटियर्स के कार्यक्रम के दौरान एमपी के डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के बयान ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। देवड़ा ने कहा कि पूरा देश, देश की सेना और सैनिक प्रधानमंत्री मोदी के चरणों में नतमस्तक हैं। इस बयान के बाद उनका नाम भी भारतीय सेना का अपमान करने वाले नेताओं में जुड़ गया है। कांग्रेस समेत सम्पूर्ण विपक्ष ने डिप्टी सीएम के इस्तीफे की मांग की है। वहीं सियासी बवाल के बाद देवड़ा ने सफाई पेश करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसा नहीं कहा था कि उनका अर्थ जनता का सेना के चरणों में नतमस्तक होने से था।

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