बदायूं महिला अस्पताल में वेंटिलेटर की कमी से 4 नवजातों ने तोड़ा दम
Sandesh Wahak Digital Desk: बदायूं के जिला महिला अस्पताल में वेंटिलेटर की कमी अब जानलेवा साबित हो रही है। एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में शनिवार को एक नहीं, बल्कि तीन नवजातों ने दम तोड़ दिया, जबकि बीते दिनों भी एक नवजात की जान जा चुकी है। वजह साफ है, यहां इलाज के लिए जरूरी मेडिकल सुविधाएं, खासकर वेंटिलेटर और सीपैप मशीनें, मौजूद नहीं हैं।
प्रीमैच्योर बच्चों की जान पर बनी
दातागंज के धर्मपाल की पत्नी ने 5 जून को एक प्रीमैच्योर बच्चे को जन्म दिया, जिसका वजन सिर्फ 780 ग्राम था। डॉक्टरों ने वेंटिलेटर की सख्त जरूरत बताई, लेकिन परिजन रेफर कराने को तैयार नहीं हुए। अगले दिन बच्चे की मौत हो गई। इसी तरह समरेर निवासी रेनू ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया, दोनों ही कमजोर थे और उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत थी। लेकिन अस्पताल में न वेंटिलेटर था, न ही सीपैप। शनिवार सुबह दोनों नवजातों की भी मौत हो गई।
रेफर करने के बाद भी नहीं ले जा पा रहे परिजन
कई बार डॉक्टर रेफर कर देते हैं, लेकिन परिवार की आर्थिक या परिवहन संबंधी मजबूरी की वजह से वे बच्चों को कहीं और नहीं ले जा पाते। थाना कादरचौक के इंतयाज की पत्नी का बच्चा भी इसी वजह से जिंदगी की जंग हार गया।
अस्पताल में वेंटिलेटर नहीं, वार्मर के लिए भी लाइन
एसएनसीयू में हर रोज 10–15 नवजात भर्ती होते हैं, लेकिन वेंटिलेटर तो दूर, यहां 12 वार्मर ही हैं, जबकि भर्ती बच्चों की संख्या अक्सर 17–18 तक पहुंच जाती है। कई मामलों में परिजन को 3–3 घंटे तक वार्मर के लिए इंतजार करना पड़ता है। आरोप यह भी हैं कि कुछ कर्मचारी पैसे लेकर वार्मर तुरंत उपलब्ध करा देते हैं।
सीएमएस ने दिया यह तर्क
अस्पताल की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षिका डॉ. इंदुकांत वर्मा ने माना कि वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है और कई बार बच्चे इतने कमज़ोर होते हैं कि उन्हें बचाना बेहद मुश्किल हो जाता है। उन्होंने बताया कि सरकार से कई बार वेंटिलेटर की मांग की गई है, लेकिन अब तक कोई व्यवस्था नहीं हो सकी है। इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है क्या यूपी के जिला अस्पतालों में नवजातों की जिंदगी यूं ही सिस्टम की लापरवाही की भेंट चढ़ती रहेगी?
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