इलाहाबाद हाईकोर्ट का कड़ा रुख: जन्म प्रमाणपत्र में हेराफेरी पर भड़का कोर्ट, FIR दर्ज करने का आदेश
Sandesh Wahak Digital Desk: जन्म प्रमाणपत्र बनवाने में होने वाली धांधली को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान पाया कि सरकारी दस्तावेजों के साथ बड़ी ही सफाई से छेड़छाड़ की गई थी। इस धोखाधड़ी को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर को संबंधित व्यक्ति और इसमें शामिल ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश दिया है।
क्या था अजीबोगरीब मामला?
यह मामला प्रयागराज के शिवशंकर पाल की याचिका से जुड़ा है। याची ने पासपोर्ट बनवाने के लिए अपनी जन्मतिथि 1994 से बदलकर 2005 करने की मांग की थी। जब न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने दस्तावेजों की जांच की, तो एक हैरान करने वाला सच सामने आया:
6 साल की उम्र में हाईस्कूल?
रिकॉर्ड के अनुसार, याची ने साल 2011 में हाईस्कूल पास किया था, जिसमें उसकी जन्मतिथि 1994 दर्ज थी। अगर उसकी जन्मतिथि 2005 मान ली जाती, तो इसका मतलब यह होता कि उसने महज 6 साल की उम्र में ही दसवीं की परीक्षा पास कर ली थी। पासपोर्ट आवेदन के दौरान पहले जो आधार कार्ड दिया गया उसमें साल 1994 था, लेकिन बाद में दिए गए आधार में इसे बदलकर 2005 कर दिया गया।
ग्राम पंचायत अधिकारी की भूमिका पर सवाल
कोर्ट तब सबसे ज्यादा नाराज हुआ जब उसने देखा कि नवंबर 2025 में ग्राम पंचायत की ओर से उसे नया जन्म प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया। कोर्ट ने इसे स्पष्ट तौर पर भ्रष्टाचार और जालसाजी का मामला माना। हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह के फर्जीवाड़े को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
पासपोर्ट के लिए रचा गया षड्यंत्र
याची ने अपनी उम्र कम दिखाने के लिए यह पूरा ताना-बाना बुना था ताकि सरकारी लाभ या अन्य किसी सुविधा का फायदा उठा सके। कोर्ट ने न सिर्फ उसकी याचिका को सिरे से खारिज कर दिया, बल्कि पुलिस को यह भी जांचने को कहा है कि आखिर किस आधार पर ग्राम पंचायत अधिकारी ने बिना जांचे-परखे यह प्रमाणपत्र जारी कर दिया।
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