आरक्षण के बहाने पंचायत चुनाव टाल रही है भाजपा, अखिलेश यादव ने वोटर लिस्ट में डकैती का लगाया आरोप
Lucknow News: सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार की चुनावी रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अखिलेश यादव का सीधा आरोप है कि भाजपा पंचायत चुनावों का सामना करने से डर रही है और इसीलिए जानबूझकर आरक्षण का पेच फंसाकर चुनाव को आगे बढ़ाना चाहती है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए एक विस्तृत सूची साझा करते हुए सनसनीखेज दावा किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन और चुनाव आयोग की मिलीभगत से ‘फॉर्म-7’ का दुरुपयोग कर विपक्षी समर्थकों के वोट काटे जा रहे हैं। अखिलेश के मुताबिक, यह कोई तकनीकी गलती नहीं बल्कि सोची-समझी साजिश है, जिसे उन्होंने ‘वोटर लिस्ट की डकैती’ करार दिया।
सपा प्रमुख ने कहा कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से गायब किए जा रहे हैं, उनमें कुर्मी, यादव, मौर्य, पाल, लोध, निषाद, पासी, बिंद, राजभर और मुस्लिम समुदाय के लोग प्रमुख हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा केवल उन जातियों और वर्गों को निशाना बना रही है जो ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का हिस्सा हैं और भाजपा की सामंतवादी सोच के खिलाफ खड़े हैं। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा, अगर चुनाव आयोग AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का ईमानदारी से इस्तेमाल करे, तो वह सीक्रेट लिस्ट सामने आ जाएगी जो भाजपा ने वोट कटवाने के लिए तैयार की है।
भाजपा का फ़र्ज़ीनामा और चुनाव आयोग की बंद कबूतरी आँख का विस्तारपूर्वक विवरण:
फ़र्ज़ी फ़ॉर्म-7 में जितने भी नाम दिखे वो सब PDA हैं: पिछड़े हैं, दलित हैं, अल्पसंख्यक-मुस्लिम हैं।
नाम कटवाने के षड्यंत्र की सूची में :
कहीं कुर्मी, कहीं पटेल
कहीं पाल, कहीं मौर्य
कहीं लोध, कहीं… pic.twitter.com/GtVKeTqJpG— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) February 17, 2026
जनता के बीच जाने का साहस खो चुकी है सरकार
अखिलेश यादव ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में भाजपा के प्रति भारी नाराजगी है। सरकार न तो जनगणना करा रही है और न ही जाति जनगणना, क्योंकि उसे अपनी पोल खुलने का डर है। उन्होंने कहा, भाजपा को पता है कि गांव-गांव में जनता उन्हें सबक सिखाने के लिए तैयार बैठी है, इसीलिए वे आरक्षण का बहाना बनाकर चुनाव को लटका रहे हैं।
चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए अखिलेश ने कहा कि आयोग को ‘कबूतर की तरह आंखें बंद’ नहीं करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि मतदाता सूची की शिकायतों के लिए हर 1-2 किलोमीटर के दायरे में केंद्र बनाए जाएं ताकि गरीब जनता की बात सुनी जा सके।
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