लखनऊ में ‘उत्सव वंदेमातरम्’: देशभक्ति के सुरों से गुंजायमान हुआ कला मण्डपम्, लोकगीत और आल्हा गायन ने बांधा समां
Sandesh Wahak Digital Desk: आकाशवाणी लखनऊ और भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को ‘उत्सव वंदेमातरम्’ का भव्य आयोजन किया गया। राष्ट्रीय गीत ‘वंदेमातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम ने स्वतंत्रता संग्राम की चेतना को संगीत और कला के माध्यम से जीवंत कर दिया।
वंदेमातरम् की गूंज और सांस्कृतिक शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डीजी (रेडियो वायरलेस) आशुतोष पांडेय ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। भातखण्डे विश्वविद्यालय के छात्र कलाकारों ने जब वंदेमातरम् के छह छंदों का समूहगान प्रस्तुत किया, तो पूरा प्रेक्षागृह तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। ‘स्वातन्त्रय स्वरांजलि’ के तहत “तेरे लिए जियें हम, तुझ पर जान निसार करें…” जैसी पंक्तियों ने उपस्थित दर्शकों की आंखों में गर्व के आंसू ला दिए।
लोकराग और आल्हा की वीरगाथा
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण उत्तर प्रदेश की मिट्टी से जुड़ी प्रस्तुतियां रहीं।
रामरथ पाण्डेय और उनके साथियों ने जब ओजपूर्ण ‘आल्हा गायन’ शुरू किया, तो वीर रस की कविताओं ने वातावरण में जोश भर दिया।
अवधी और भोजपुरी लोकगीतों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को अपनी जड़ों से जुड़ने का एहसास कराया।
साहित्यिक और नाट्य प्रस्तुति
डॉ. शिव ओम अम्बर, हिना रिज़वी हैदर और डॉ. सुमन दुबे जैसे प्रख्यात कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से राष्ट्र चेतना को स्वर दिए।
भारतेंदु नाट्य अकादमी के कलाकारों ने बंकिम चंद्र चटर्जी की अमर कृति ‘आनंदमठ’ का प्रभावशाली नाट्य रूपांतरण पेश किया, जिसने दर्शकों को स्वाधीनता संग्राम के दौर में पहुंचा दिया।
प्रतिभाओं का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान ‘इतिहास के पन्नों से’ शीर्षक के तहत क्विज और भाषण प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं, जिसमें युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पुरस्कार जीते। आकाशवाणी लखनऊ की कार्यक्रम प्रमुख सुमोना पांडेय ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि उप निदेशक राजीव रंजन पांडेय ने सभी का आभार व्यक्त किया।
इस यादगार शाम में शहर के गणमान्य नागरिकों, कलाकारों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने शिरकत कर इसे सफल बनाया।
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