सांसद किशोरी लाल शर्मा केस में लापरवाही पर कोर्ट का सख्त रुख, DM को ऐक्शन का निर्देश
Sandesh Wahak Digital Desk: कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बेहद करीबी एवं अमेठी से सांसद किशोरी लाल शर्मा के खिलाफ दर्ज एक पुराने मुकदमे में रायबरेली पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। अदालत ने विवेचना (जांच) में हुई देरी और साक्ष्यों के गायब होने को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी (DM) को दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने और उसकी विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला? (2012 से अब तक)
मुकदमे की शुरुआत (2012): रायबरेली के मिल एरिया थाना क्षेत्र के एक अधिवक्ता शकील अहमद खान ने तत्कालीन सोनिया गांधी के प्रतिनिधि किशोरी लाल शर्मा और आधा दर्जन कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। अभियुक्तों पर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने और दंगा भड़काने जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज था।
पुलिस ने 4 साल की जांच के बाद 2016 में चार्जशीट दाखिल की, जिसे अदालत ने खामियों के कारण खारिज कर दोबारा विवेचना का आदेश दिया। दोबारा जांच के आदेश के बाद पिछले 9 वर्षों तक विवेचना पूरी नहीं की गई।
कोर्ट की फटकार और चौंकाने वाला खुलासा
अदालत द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण में शहर कोतवाल ने जो जवाब दाखिल किया, उसने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विवेचना के दौरान करीब आधा दर्जन दरोगा सहित 7 पुलिस अधिकारियों ने घोर लापरवाही बरती। पुलिस ने स्वीकार किया कि इतने लंबे समय में मामले से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य और प्रपत्र (Documents) गायब हो चुके हैं। बताया गया कि जांच करने वाले अधिकांश अधिकारियों का जिले से स्थानांतरण हो चुका है।
अदालत का कड़ा आदेश
न्यायालय ने इसे न्याय प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ मानते हुए पुलिस विभाग को पत्र लिखा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रपत्रों का गायब होना और जांच में एक दशक की देरी करना अक्षम्य है। जिलाधिकारी को निर्देशित किया गया है कि वे उन सभी विवेचकों को चिह्नित करें जिन्होंने इस मामले को ठंडे बस्ते में डाला।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
पुलिस अधीक्षक (SP) रवि कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा है कि यह काफी पुराना प्रकरण है और न्यायालय के आदेशों का अक्षरशः पालन किया जाएगा। पूरे मामले की फाइल तलब कर दोषी कर्मियों पर विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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