Lucknow News: खाकी की चुप्पी से बेखौफ हुए चोर, डेढ़ माह बाद भी दर्ज नहीं हुईं कई चोरियां
Sandesh Wahak Digital Desk: राजधानी लखनऊ के रहीमाबाद थाना क्षेत्र में अपराध नियंत्रण के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। यहां पुलिस चोरी की घटनाओं को दर्ज करने के बजाय उन्हें ‘दबाने’ में जुटी है। आलम यह है कि डेढ़ महीने पहले हुई वारदातों से लेकर पांच दिन पूर्व सीसीटीवी में कैद हुई मोबाइल चोरी तक, पुलिस ने किसी भी मामले में रिपोर्ट दर्ज करना मुनासिब नहीं समझा है। पुलिस के इस निरंकुश रवैये से स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आम जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।

केस 1: फुटेज में कैद हुआ चोर, पर पुलिस मौन
ग्राम गौंदा मुअज्जमनगर निवासी अटल मौर्य का मोबाइल फोन 22 मार्च को भतोईया स्थित सोनू मेडिकल स्टोर पर छूट गया था। स्टोर के सीसीटीवी कैमरे में चोरी की पूरी घटना कैद हो गई, जिसके आधार पर पीड़ित ने चिंहुटा निवासी अनमोल की शिनाख्त की और नामजद तहरीर दी। पीड़ित का आरोप है कि 5 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने न तो आरोपी को पकड़ा और न ही मोबाइल बरामद किया।
केस 2: डंपर की बैटरी चोरी (15 फरवरी)
विगत 15 फरवरी को ग्राम जिंदौर निवासी नूर आलम उर्फ नूरी के घर के बाहर खड़े उनके मित्र के डंपर से चोरों ने बैटरी पार कर दी थी। नूर आलम ने उसी समय थाने में तहरीर दी थी, लेकिन डेढ़ माह बीतने के बाद भी इस मामले में कोई एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की गई।
केस 3: अंत्येष्टि स्थल पर भी चोरों का धावा (16 फरवरी)
16 फरवरी की रात चोरों ने ग्राम पंचायत मवईकलां के अंत्येष्टि स्थल को निशाना बनाया। चोर वहां लगे लोहे के गेट और पानी की टोंटियां उखाड़ ले गए। कार्यवाहक ग्राम प्रधान प्रीति मौर्य ने इसकी लिखित शिकायत की, लेकिन पुलिस इस मामले को भी ‘पानी की तरह पी गई’।
जनता का सवाल: आखिर किसके संरक्षण में हैं चोर?
रहीमाबाद पुलिस द्वारा रिपोर्ट दर्ज न करने से क्षेत्र में चोरों के हौसले बुलंद हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब पुलिस छोटी-छोटी चोरियों पर अंकुश नहीं लगा पा रही और रिपोर्ट तक दर्ज नहीं कर रही, तो सुरक्षा का भरोसा कैसे किया जाए? जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन मामलों में कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उच्चाधिकारियों से इसकी शिकायत करेंगे।
रिपोर्ट: सुरेंद्र कुमार शेरा
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