UP News: कबाड़ ट्रकों के कागजों पर चल रहा था काला खेल, STF ने मास्टरमाइंड कासिम को दबोचा
फाइनेंस की किस्तें डकारने और चोरी के ट्रकों का हुलिया बदलने वाला शातिर गिरोह बेनकाब, RTO एजेंट के साथ मिलकर प्रयागराज और मेरठ से जुड़ा था नेटवर्क
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की फील्ड इकाई प्रयागराज ने एक ऐसे शातिर गिरोह के सरगना को गिरफ्तार किया है, जो कबाड़ हो चुके ट्रकों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर चोरी और फाइनेंस की गई ट्रकों को ऊंचे दामों पर बेचने का काला कारोबार कर रहा था। एसटीएफ ने कौशाम्बी के कोखराज थाना क्षेत्र से मुख्य अभियुक्त कासिम अहमद को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से फर्जी नंबर प्लेट और ट्रक बरामद किए हैं।
गिरफ्तार अभियुक्त और बरामदगी
अभियुक्त: कासिम अहमद (निवासी मरियाडीह, प्रयागराज)।
बरामदगी: 12 फर्जी नंबर प्लेट, 06 फर्जी रजिस्ट्रेशन पेपर, एक 16 चक्का टाटा ट्रक (UP 70 RT 4001) और एक बिना नंबर का महिंद्रा घोड़ा (6 चक्का)।
कैसे होता था ‘ट्रकों की पहचान’ बदलने का खेल?
पूछताछ में कासिम ने इस गोरखधंधे की पूरी कार्यप्रणाली का खुलासा किया कि गिरोह दूसरे राज्यों (जैसे असम) से कबाड़ हो चुके ट्रकों को अपने नाम ट्रांसफर कराकर एनओसी (NOC) लेता था। इसके बाद चोरी की गई या फाइनेंस पर ली गई ट्रकों का असली चेचिस नंबर मिटाकर उस पर कबाड़ वाले ट्रक का नंबर पंच कर दिया जाता था। प्रयागराज का आरटीओ एजेंट अनिल तिवारी और मेरठ का मो० तारिक इस खेल के अहम हिस्से थे, जो फर्जी कागजात तैयार करवाने और वाहन ट्रांसफर में मदद करते थे।
कासिम ने बताया कि उसने श्रीराम फाइनेंस से ₹44 लाख का लोन लेकर ट्रक खरीदा था। किस्त अदायगी से बचने के लिए उसने ट्रक का नंबर बदलकर उसे ₹30 लाख में दूसरे राज्य में बेचने का सौदा तय किया था।
करोड़ों का चूना, वर्षों से सक्रिय गिरोह
अभियुक्त ने स्वीकार किया कि वे पिछले कई वर्षों से फाइनेंस कंपनियों को चूना लगा रहे थे। गिरोह का मुख्य उद्देश्य फाइनेंस की किस्तों से बचना और चोरी के वाहनों को ‘लीगल’ दिखाकर बाजार में खपाना था। एसटीएफ के पुलिस उपाधीक्षक शैलेश प्रताप सिंह के पर्यवेक्षण और निरीक्षक जय प्रकाश राय के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई ने वाहन चोरों के एक बड़े सिंडिकेट की कमर तोड़ दी है।
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