तेजी से आगे बढ़ रहा भारत के स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम का काम, जानिए क्या है प्रोजेक्ट कुशा

Sandesh Wahak Digital Desk: भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में देश का स्वदेशी लंबी दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम प्रोजेक्ट कुशा (Project Kusha) अब अहम चरण में पहुंच गया है। भारतीय वायु सेना (IAF) ने इस सिस्टम की पांच स्क्वाड्रन खरीद को मंजूरी दे दी है, जिससे यह प्रोजेक्ट शुरुआती प्रोडक्शन स्टेज में प्रवेश कर चुका है। इस डील की कुल लागत करीब 21,700 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

2026 के अंत तक यूजर ट्रायल

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 2026 की शुरुआत में M1 इंटरसेप्टर मिसाइल के शुरुआती फ्लाइट टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। इस मिसाइल में डुअल-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर लगाया गया है, जो अंतिम चरण में अधिक गति और सटीकता के साथ लक्ष्य को भेदने की क्षमता देता है।

करीब 150 किलोमीटर की रेंज वाली यह मिसाइल 2026 के अंत तक बड़े स्तर पर यूजर ट्रायल के लिए तैयार की जा रही है, जो इस सिस्टम की तैनाती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

एडवांस रडार और नेटवर्क सिस्टम से लैस

प्रोजेक्ट कुशा की खास बात यह है कि इसकी टेस्टिंग के साथ-साथ प्रोडक्शन भी शुरू कर दिया गया है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड शुरुआती मिसाइल और ग्राउंड सिस्टम तैयार करने में जुटी हैं। यह संकेत देता है कि सेना को इस सिस्टम की तत्काल आवश्यकता है और स्वदेशी तकनीक पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है।

इस एयर डिफेंस सिस्टम में मल्टी-फंक्शन कंट्रोल रडार (MFCR), बैटल मैनेजमेंट रडार और मोबाइल लॉन्च यूनिट्स शामिल हैं। साथ ही यह सिस्टम सीधे IACCS नेटवर्क से जुड़ा होगा, जिससे रियल टाइम में डेटा शेयरिंग और तेज प्रतिक्रिया संभव होगी।

S-400 का देसी विकल्प बनने की दिशा में बड़ा कदम

रणनीतिक रूप से प्रोजेक्ट कुशा को रूस के S-400 सिस्टम के साथ मिलकर काम करने और भविष्य में उसका विकल्प बनने के रूप में देखा जा रहा है। यह सिस्टम विदेशी विकल्पों की तुलना में सस्ता है और इसके सॉफ्टवेयर व अपग्रेड पर पूरी तरह भारत का नियंत्रण रहेगा।

ड्रोन हमलों, स्टेल्थ तकनीक और एक साथ कई मिसाइल हमलों जैसे आधुनिक खतरों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया यह सिस्टम भारत को मजबूत और आत्मनिर्भर एयर डिफेंस क्षमता प्रदान करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रोजेक्ट देश की सुरक्षा के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है।

तीन लेयर में तैयार किया गया सुरक्षा कवच

प्रोजेक्ट कुशा को तीन स्तरों में विकसित किया गया है, जिससे विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। M1 मिसाइल 150 किलोमीटर तक की रेंज में फाइटर जेट, ड्रोन और क्रूज मिसाइल को निशाना बनाएगी। M2 मिसाइल, जिसकी रेंज 250 किलोमीटर होगी, स्टेल्थ एयरक्राफ्ट और तेज गति वाले खतरों के लिए विकसित की जा रही है, जिसका परीक्षण 2027 में प्रस्तावित है।

इसके अलावा M3 मिसाइल, जिसकी रेंज 350 से 400 किलोमीटर तक होगी, AWACS और एयर टैंकर जैसे बड़े लक्ष्यों को निशाना बनाएगी और इसका परीक्षण 2028 में किया जाएगा। इस पूरे सिस्टम की सिंगल शॉट किल क्षमता 80 प्रतिशत से अधिक बताई जा रही है, जो इसे बेहद प्रभावी बनाती है।

 

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