Varanasi News: फर्जी कर्नल बनकर ठगी करने वाला मास्टरमाइंड गिरफ्तार, एसटीएफ और मिलिट्री इंटेलिजेंस का संयुक्त एक्शन

Varanasi News: उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने वाराणसी में एक ऐसे शातिर जालसाज को बेनकाब किया है जो खुद को भारतीय सेना का कमांडिंग ऑफिसर बताकर बेरोजगार युवकों को अपना शिकार बनाता था। एसटीएफ की फील्ड इकाई वाराणसी ने मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) के साथ मिलकर इस गिरोह के सरगना धर्मेन्द्र पाण्डेय को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है।

एसटीएफ को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि वाराणसी और आसपास के जिलों में एक गिरोह सक्रिय है जो सेना, रेलवे और शिक्षा विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से लाखों रुपये ऐंठ रहा है। अपर पुलिस अधीक्षक (STF) विनोद कुमार सिंह के निर्देशन में इंस्पेक्टर अनिल कुमार सिंह की टीम इस पर काम कर रही थी।

इसी बीच मिलिट्री इंटेलिजेंस ने भी इनपुट साझा किया कि एक व्यक्ति फर्जी आर्मी आईडी कार्ड के जरिए लोगों को गुमराह कर रहा है। सोमवार (30 मार्च) की रात मुखबिर से सटीक सूचना मिली कि मुख्य आरोपी धर्मेन्द्र पाण्डेय भेलूपुर क्षेत्र के ‘विभूति इन्क्लेव’ अपार्टमेंट में किराए के फ्लैट पर छिपा है। एसटीएफ ने बिना वक्त गंवाए छापेमारी की और उसे धर दबोचा।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान धर्मेन्द्र पाण्डेय (पुत्र स्व. बसावन पाण्डेय) के रूप में हुई है, जो जनपद चन्दौली के अलीनगर थाना क्षेत्र के कैली गांव का निवासी है। तलाशी के दौरान आरोपी के पास से जो सामान मिला, उसने पुलिस को भी चौंका दिया।

भारतीय सेना का फर्जी आईडी कार्ड: आरोपी खुद को कर्नल (आर्मी इंटेलिजेंस अल्फा-1) बताता था।

फर्जी दस्तावेज: 3 अलग-अलग नंबरों वाले आधार कार्ड, 3 अलग-अलग नंबरों वाले पैन कार्ड और अलग-अलग पतों पर बने 2 ड्राइविंग लाइसेंस।

बैंक कार्ड: 3 एटीएम कार्ड और कई बैंकों के खाते।

अन्यों के दस्तावेज: दूसरे युवकों के हाई स्कूल के अंकपत्र और प्रमाण पत्र।

मोबाइल: 2 मोबाइल फोन।

वर्दी का रसूख और फर्जी खातों का खेल

पूछताछ में सामने आया कि धर्मेन्द्र पाण्डेय बेहद शातिर किस्म का अपराधी है। उसने खुद को आर्मी का कर्नल बताकर ऐसा रसूख कायम किया था कि बेरोजगार युवक आसानी से उसके झांसे में आ जाते थे। वह बिहार के कुछ अपराधियों के संपर्क में भी था।

आरोपी ने पूछताछ में कुबूल किया कि उसने फर्जी आधार और पैन कार्ड इसलिए बनवाए थे ताकि अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवा सके और पुलिस की पकड़ में न आए। वह नौकरी दिलाने के नाम पर मोटी रकम सीधे इन्हीं खातों में लेता था। जब युवक नौकरी न मिलने पर अपना पैसा वापस मांगते थे, तो वह उन्हें दूसरे विभाग (जैसे रेलवे या पैरामिलिट्री) में सेटिंग का झांसा देकर टाल देता था। अब तक वह लाखों रुपये डकार चुका है।

एसटीएफ ने आरोपी धर्मेन्द्र पाण्डेय को वाराणसी के भेलूपुर थाना पुलिस के हवाले कर दिया है। उसके खिलाफ भेलूपुर थाने में मु.अ.सं. 177/2026 के तहत बीएनएस (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। स्थानीय पुलिस अब मामले की आगे की कानूनी जांच कर रही है।

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