लखीमपुर खीरी: GST और साइबर धोखाधड़ी करने वाले अंतरजनपदीय गिरोह का पर्दाफाश, 4 शातिर गिरफ्तार

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों और पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण के नेतृत्व में प्रदेश भर में जारी साइबर अपराधियों के विरुद्ध सघन अभियान को लखीमपुर खीरी में बड़ी सफलता मिली है। पुलिस अधीक्षक खीरी के निर्देशन में थाना साइबर क्राइम की टीम ने एक ऐसे शातिर गिरोह को दबोचा है जो भोले-भाले ग्रामीणों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन और वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दे रहा था।

ऐसे बिछाया जाता था जाल: ‘दस्तावेज आपके, मुनाफा हमारा’

पकड़े गए अभियुक्तों की कार्यप्रणाली बेहद शातिर थी। यह गिरोह गांव-गांव जाकर गरीब और कम पढ़े-लिखे लोगों को बहला-फुसलाकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो हासिल कर लेता था। इन दस्तावेजों के आधार पर गिरोह फर्जी ‘किरायानामा’ और ‘पार्टनरशिप डीड’ तैयार करता था। इसके बाद उन्हीं के नाम पर फर्जी जीएसटी और उद्यम रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट प्राप्त किए जाते थे।

फर्जी खातों के जरिए करोड़ों का लेनदेन (मनी लॉन्ड्रिंग) और जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट की चोरी की जाती थी। जाली आईडी पर सिम कार्ड एक्टिवेट कर साइबर अपराधों को अंजाम दिया जाता था।

इन अभियुक्तों को पुलिस ने दबोचा

साइबर थाना पुलिस ने घेराबंदी कर गिरोह के 4 प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया है।

दीपक सिंह उर्फ भीमा: (बाराबंकी) – गिरोह का मुख्य सदस्य, जिसके पास से भारी मात्रा में चेकबुक और डिजिटल डिवाइस मिलीं।

अंकित द्विवेदी: (सीतापुर) – फर्जी किरायानामा और स्टाम्प पेपर तैयार करने का मास्टरमाइंड।

धीरेन्द्र सिंह उर्फ कमल: (सीतापुर) – दस्तावेजों के संकलन और हेरफेर में शामिल।

राजू: (खीरी) – स्थानीय स्तर पर भोले-भाले लोगों को चिन्हित कर उन्हें गिरोह से जोड़ने वाला।

बरामदगी की लंबी फेहरिस्त: ‘मिनी दफ्तर’ बरामद

पुलिस ने अभियुक्तों के कब्जे से अपराध में प्रयुक्त सामग्री का जखीरा बरामद किया है।

डिजिटल उपकरण: 1 लैपटॉप, 5 मोबाइल फोन, 1 पेन ड्राइव और 1 डिजिटल सिग्नेचर डिवाइस।

दस्तावेज: 37 सिम कार्ड, 26 चेकबुक, 16 पैन कार्ड, 20 आधार कार्ड और 21 किरायानामा स्टाम्प।

सर्टिफिकेट: 4 जीएसटी और 4 उद्यम रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट सहित कई पार्टनरशिप डीड।

नगदी: ₹26,100 नगद और 14 एटीएम कार्ड।

थाना साइबर क्राइम पर इनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं (340(2), 319(2), 318(4) आदि) और आईटी एक्ट की धारा 66C के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है।

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