कानपुर किडनी कांड: ‘रेलवे क्रॉसिंग’ वाले नामी नर्सिंगहोम का खुला राज, गिरफ्त में आए टेक्नीशियनों ने किए बड़े खुलासे
Sandesh Wahak Digital Desk: कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के काले खेल का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने दो हाई-प्रोफाइल ओटी (OT) टेक्नीशियनों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में जो सच सामने आया है, उसने शहर के चिकित्सा जगत और प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है। पकड़े गए आरोपियों ने रेलवे क्रॉसिंग के पास स्थित एक बेहद ‘नामी नर्सिंगहोम’ का नाम उजागर किया है, जहां हाल ही में एक अवैध ट्रांसप्लांट को अंजाम दिया गया था।
हवाई जहाज से सफर और लाखों के वारे-न्यारे
पकड़े गए ओटी टेक्नीशियन राजेश कुमार और कुलदीप सिंह राघव कोई मामूली कर्मचारी नहीं हैं। राजेश की सैलरी 70 हजार रुपये महीना है और वह नोएडा के एक बड़े अस्पताल में ओटी मैनेजर है, जबकि कुलदीप को 42 हजार रुपये मिलते हैं। ये दोनों हर केस के लिए 40 से 50 हजार रुपये अलग से कमीशन लेते थे। चौंकाने वाली बात यह है कि ये टीमें दिल्ली/NCR से कानपुर फ्लाइट (हवाई जहाज) से आती थीं और काम खत्म कर तुरंत रवाना हो जाती थीं।

शनिवार और रविवार को सजती थी ‘मौत की मंडी’
डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी के मुताबिक, इस गिरोह का काम करने का तरीका बेहद शातिर था। शहर के आहूजा हॉस्पिटल और एक अन्य बड़े नर्सिंगहोम में यह खेल मुख्य रूप से शनिवार और रविवार को होता था, ताकि किसी को शक न हो। डॉक्टरों को ठहराने के लिए केशवपुरम और रावतपुर के होटलों में व्यवस्था की जाती थी, जिसकी जिम्मेदारी शिवम अग्रवाल नाम का व्यक्ति संभालता था।
OT टेक्नीशियनों ने खोले गिरोह के राज
डॉक्टरों का नेटवर्क: डॉ. रोहित (एनेस्थीसिया), डॉ. अली और डॉ. सैफ (सर्जन) जैसे बड़े नाम इस गिरोह से जुड़े हैं।
लोकेशन: रेलवे क्रॉसिंग के पास बना एक बड़ा नर्सिंगहोम, जहां भारी भीड़ रहती है, वहां भी ट्रांसप्लांट हुए हैं।
दो किडनी का था प्लान: रविवार रात दो ट्रांसप्लांट होने थे, लेकिन पुलिस की सक्रियता के डर से टीम एक ही करके भाग निकली।
डोनर का कनेक्शन: गिरोह के तार झारखंड और नेपाल के डोनरों से जुड़े हुए हैं।
CCTV और UPI पेमेंट ने बिगाड़ा खेल
आहूजा हॉस्पिटल के सीसीटीवी कैमरे तो बंद कर दिए गए थे, लेकिन पुलिस ने हार नहीं मानी। बगल के प्रतिष्ठान में लगे कैमरों ने गिरोह की किया कैरेंस (Kia Carens) और अर्टिगा (Ertiga) कारों की फुटेज कैद कर ली। इसके बाद यूपीआई (UPI) ट्रांजेक्शन के जरिए पुलिस इन तक पहुंचने में कामयाब रही।
पुलिस की रडार पर ‘नामी’ अस्पताल
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि मामले में कई टीमें लगा दी गई हैं। क्राइम ब्रांच और साइबर सेल भी सक्रिय है। पुलिस अब उस मरीज के परिजनों से पूछताछ कर रही है जिसे हाल ही में किडनी लगाई गई है। गिरोह का नेटवर्क गाजियाबाद, नोएडा और वैशाली जैसे इलाकों में फैला हुआ है।
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