‘इतनी शक्ति हमें देना दाता…’ बिजली मुख्यालय पर संविदा कर्मियों ने हाथ जोड़कर मांगा अपना हक
समान कार्य-समान वेतन समेत 11 सूत्रीय मांगों को लेकर UPPCL के खिलाफ हल्ला बोल, मुख्यालय के बाहर सड़क पर उतरे निविदा कर्मचारी, काम ठप करने की दी चेतावनी
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को बिजली विभाग के निविदा (संविदा) कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के मुख्यालय के बाहर जुटे सैकड़ों कर्मचारियों ने गांधीवादी तरीके से आंदोलन की शुरुआत की। उन्होंने हाथ जोड़कर ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता’ प्रार्थना गाकर विभाग को कुंभकर्णी नींद से जगाने का प्रयास किया।

प्रार्थना के बाद गर्जना
शांतिपूर्ण प्रार्थना के बाद कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा और वे मुख्यालय के गेट पर ही धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों का कहना है कि वे स्थायी कर्मियों के बराबर जोखिम उठाकर काम करते हैं, लेकिन उन्हें बहुत कम वेतन दिया जा रहा है। संविदा कर्मियों ने सुरक्षा उपकरण, बीमा, और वेतन विसंगतियों को दूर करने सहित 11 सूत्रीय मांगें शासन के सामने रखी हैं।

- निविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए।
- समान कार्य के लिए समान वेतन लागू किया जाए।
- न्यूनतम वेतनमान का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
- समय पर वेतन भुगतान की मांग
- कार्य के दौरान दुर्घटना होने पर बीमा और उचित मुआवजा दिया जाए।
- ठेकेदारी प्रथा में पारदर्शिता लाई जाए।
- कार्य समय और शिफ्ट व्यवस्था को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाए।
- बिना कारण कर्मचारियों की छंटनी पर रोक लगाई जाए।
- वर्षों से कार्यरत कर्मियों को स्थायी सेवा का दर्जा दिया जाए।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कम वेतन के कारण उनके परिवारों के सामने आर्थिक और सामाजिक संकट खड़ा हो गया है, जबकि विभाग बार-बार आश्वासन देकर मुकर जाता है।

प्रदेशव्यापी आंदोलन और ब्लैकआउट की चेतावनी
प्रदर्शन कर रहे यूनियन नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह केवल ट्रेलर है। “हमने कई बार ज्ञापन दिया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। यदि हमारी जायज मांगों पर तुरंत निर्णय नहीं लिया गया, तो हम पूरे उत्तर प्रदेश में बिजली कार्य बाधित (Blackout) करने को मजबूर होंगे।”

अधिकारियों की चुप्पी
प्रदर्शन के दौरान मुख्यालय पर गहमागहमी बनी रही। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कर्मचारियों ने नारेबाजी जारी रखी। कर्मचारियों का साफ कहना है कि जब तक ठोस लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
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