UP News: अनाज घोटाले के आरोपी को क्यों थमाई थी प्रमुख सचिव की कुर्सी?
समाज कल्याण के सर्वोदय विद्यालयों में 100 प्रवक्ताओं के प्रमोशन कांड में फंसी है इस आईएएस की गर्दन
Sandesh Wahak Digital Desk: यूपी की ताकतवर नौकरशाही का रुतबा उस योगी सरकार में कायम है। जिसकी प्राथमिकता भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति है।
तभी ईओडब्ल्यू ने करोड़ों के अनाज घोटाले में जिस वरिष्ठ आईएएस को आरोपी ठहराते हुए केस चलाने की मंजूरी मांगी थी। उस पर दरियादिली दिखाते हुए पहले मामले को रफा-दफा कराया गया। फिर प्रमुख सचिव समाज कल्याण की मलाईदार कुर्सी थमा दी गयी। नतीजा सर्वोदय विद्यालयों में सौ प्रवक्ताओं को प्रिंसिपल बनाकर प्रमोशन घोटाले के रूप में सामने आया।
जिसकी जांच में तत्कालीन प्रमुख सचिव समेत शासन के बड़े अफसरों की गर्दन फंस गयी हैं। भले तत्कालीन प्रमुख सचिव और विशेष सचिव के खिलाफ शासन ने नियुक्ति विभाग को पत्र भेजा है। लेकिन उक्त आईएएस पिछली बार की तर्ज पर इस बार भी बच निकलने में कामयाब हो जाएगा।
अनाज घोटाले में भी सुर्खियां बटोर चुके
दो साल पहले शासन के बड़े अफसरों की मंशा होती तो प्रमोशन घोटाला रुक सकता था। लेकिन समाज कल्याण निदेशालय से अफसरों ने विवादित फाइल जैसे ही बढ़ाई, शासन ने झट स्वीकृति दे दी। जांच की आंच में झुलस रहे तत्कालीन प्रमुख सचिव बलिया में सीडीओ रहते संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना के तहत करोड़ों के अनाज घोटाले में भी सुर्खियां बटोर चुके हैं।
ईओडब्ल्यू ने पांच वर्ष पहले इस आईएएस (वर्तमान में एक विभाग के प्रमुख सचिव) समेत बलिया के तत्कालीन चार सीडीओ के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मंजूरी मांगी थी। छोटों के खिलाफ तो मंजूरी मिली। लेकिन उक्त आईएएस समेत अन्य अफसरों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य के बावजूद अभियोजन स्वीकृति की फाइल कई वर्ष लंबित रखी गयी। फिर न्याय विभाग ने मंथन के बाद ईओडब्ल्यू की 500 पेज की केस डायरी नियुक्ति विभाग को भेजी।
लेकिन नौकरशाही के दबाव में अभियोजन मंजूरी देने से शासन ने इंकार कर दिया। बसपा सुप्रीमो मायावती के खास इस आईएएस को सपा-भाजपा शासन के दौरान अहम तैनातियों से दूर रखा गया। 2022 में सितारे बदले और समाज कल्याण का प्रमुख सचिव बनकर तीन साल तक मलाईदार तैनाती पर बैठे रहे।
कारपोरेट स्टाइल में चमकाया था दफ्तर
प्रमोशन घोटाले में सुर्खियां बटोर रहे पूर्व प्रमुख सचिव समाज कल्याण ने बापू भवन स्थित दफ्तर को चमकाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी थी। कारपोरेट स्टाइल में सौंदर्यीकरण कराकर काफी सरकारी धन खर्च कराया था।
डीएम गोरखपुर रहते योगी को भेजा था जेल, संसद में रो पड़े थे सीएम
प्रमोशन घोटाले की जांच की आंच में तप रहे तत्कालीन प्रमुख सचिव समाज कल्याण 2007 में गोरखपुर डीएम के पद पर तैनात थे। उन्होंने तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर में घुसने पर गिरफ्तार कराकर जेल भेजा था। 11 दिन बाद रिहा होने पर गिरफ्तारी की बात करते समय संसद में योगी आदित्यनाथ के खूब आंसू छलके थे। उक्त मामले ने जैसे ही सियासी सुर्खियां बटोरीं, गिरफ्तारी के 24 घंटे बाद ही तत्कालीन डीएम को सस्पेंड कर दिया गया था। हालांकि योगी 2.0 में सीएम ने इस आईएएस को माफ करके समाज कल्याण विभाग जैसे अहम महकमे का प्रमुख सचिव बना दिया।
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