टाइगर रिजर्व के असली रक्षकों को 10 महीने से नहीं मिला वेतन, दाने-दाने को मोहताज हुए 1100 वाचर
Lucknow News: उत्तर प्रदेश के जंगलों और बाघों की सुरक्षा में अपनी जान जोखिम में डालने वाले वाचर इन दिनों खुद गहरे संकट में हैं। प्रदेश के दुधवा, कतर्नियाघाट, पीलीभीत और रानीपुर टाइगर रिजर्व में तैनात 1103 वाचरों को पिछले 8 से 10 महीनों से उनका मेहनताना (सैलरी) नहीं मिला है। बाघों और शिकारियों के बीच दीवार बनकर खड़े रहने वाले इन कर्मचारियों के सामने अब अपने परिवार का पेट पालना भी मुश्किल हो गया है।
इन वाचरों को टाइगर रिजर्व की पहली सुरक्षा पंक्ति और रीढ़ माना जाता है। जंगल की खाक छानने और पल-पल का अपडेट रखने का सबसे कठिन काम यही करते हैं। विडंबना देखिए कि जोखिम भरे हालात में काम करने के बावजूद इन्हें पारिश्रमिक के लिए केंद्र सरकार के बजट का इंतजार करना पड़ता है।
बजट की कमी बनी बड़ी बाधा
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रोजेक्ट टाइगर) राम कुमार ने बताया कि वाचरों के भुगतान के लिए केंद्र सरकार से पैसा आता है। इस बार हालात इसलिए बिगड़े क्योंकि श्रमिकों की कुल देनदारी लगभग 7 करोड़ रुपये है। केंद्र सरकार से केवल 1.02 करोड़ रुपये ही मिले हैं, जो ऊंट के मुँह में जीरे के समान है। केंद्र ने देशभर के टाइगर रिजर्व का बजट 290 करोड़ से घटाकर 153 करोड़ कर दिया। यूपी जब तक कागजी कार्रवाई पूरी करता, तब तक बजट खत्म हो चुका था।
वन विभाग अब भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए महाराष्ट्र मॉडल अपनाने पर विचार कर रहा है। इसके तहत वाचरों के वेतन का इंतजाम स्टेट सेक्टर (राज्य निधि) से करने की कोशिश की जा रही है, ताकि केंद्र से बजट आने में देरी होने पर भी कर्मचारियों का चूल्हा न बुझे।

