पश्चिमी यूपी बना सियासी प्रयोगशाला: अखिलेश के ‘दादरी दांव’ की काट खोजेंगे योगी-जयंत, मुजफ्फरनगर में 13 अप्रैल को महासंग्राम

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों का बिगुल आधिकारिक रूप से भले ही न बजा हो, लेकिन पश्चिमी यूपी की धरती अब नई राजनीतिक इबारत लिखने के लिए तैयार है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की दादरी रैली के बाद अब भाजपा-रालोद गठबंधन ने अपनी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। 13 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी मुजफ्फरनगर के नुमाइश मैदान में एक विशाल संयुक्त जनसभा को संबोधित करेंगे।

9 अप्रैल की जगह अब 13 अप्रैल: क्या है रणनीति?

पहले यह कार्यक्रम 9 अप्रैल को प्रस्तावित था, लेकिन अब इसे 13 अप्रैल के लिए तय किया गया है। इसे केवल एक रैली के रूप में नहीं, बल्कि युवाओं और किसानों के बीच पैठ बनाने के ‘मास्टरस्ट्रोक’ के रूप में देखा जा रहा है।

इस दिन मुजफ्फरनगर में एक विशाल रोजगार मेले का आयोजन होगा, जिसमें करीब 150 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां शिरकत करेंगी। लक्ष्य 5,000 युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपना है। मुजफ्फरनगर, जो जाट राजनीति का केंद्र है, वहाँ योगी और जयंत की मौजूदगी का मकसद संजीव बालियान और संगीत सोम के बीच की हालिया ‘सियासी अदावत’ से पैदा हुई दूरियों को पाटना है।

अखिलेश का ‘दादरी दांव’ और गुर्जर पॉलिटिक्स

हाल ही में अखिलेश यादव ने दादरी (गौतमबुद्ध नगर) में मिहिर भोज डिग्री कॉलेज मैदान से गुर्जर-मुस्लिम-PDA कार्ड खेला था। उन्होंने सत्ता में आने पर गुर्जर महानायकों की प्रतिमाएं लगवाने का वादा कर भाजपा के इस मजबूत वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है। 13 अप्रैल की रैली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस ‘गुर्जर मलाल’ को दूर करने के लिए किसी बड़ी घोषणा या कड़े संदेश के साथ उतर सकते हैं।

पश्चिम यूपी: लखनऊ की सत्ता का प्रवेश द्वार

यूपी की 403 विधानसभा सीटों में से 137 सीटें पश्चिमी यूपी के 26 जिलों से आती हैं। इतिहास गवाह है कि जिसने पश्चिमी यूपी जीत ली, लखनऊ की गद्दी उसकी हो गई। लोकसभा चुनाव में पश्चिमी बेल्ट में भाजपा को कुछ नुकसान हुआ था, जिसकी भरपाई के लिए अब जयंत चौधरी का साथ बेहद अहम है। महाराजा सूरजमल की प्रतिमा अनावरण के बाद जाट राजनीति में जो हलचल मची है, उसे शांत करना जयंत चौधरी के लिए बड़ी परीक्षा है।

मिशन-2027: गांव-गांव दी जा रही दस्तक

भाजपा और रालोद के कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे कैराना, मेरठ और सहारनपुर तक से भीड़ जुटाने के लिए गांव-गांव ‘ट्रैक्टर-ट्रॉली’ मार्च और बैठकें करें। मुजफ्फरनगर रालोद का गढ़ रहा है, और अब भाजपा के साथ आने से यह ‘डबल इंजन’ की ताकत पश्चिमी यूपी के दुर्ग को दुरुस्त करने की पटकथा लिखेगी।

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