CM स्टालिन ने जलाई परिसीमन विधेयक की प्रतियां, पूरे राज्य में फहराए गए काले झंडे
Sandesh Wahak Digital Desk: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके (DMK) प्रमुख एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन प्रक्रिया के खिलाफ गुरुवार को कड़ा रुख अख्तियार किया। मुख्यमंत्री ने न केवल अपने आवास पर काला झंडा फहराया, बल्कि निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान उन्होंने तमिलनाडु लड़ेगा, तमिलनाडु जीतेगा का नारा बुलंद किया।
मुख्यमंत्री के आह्वान पर पूरे तमिलनाडु में डीएमके कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। चेन्नई से लेकर कन्याकुमारी तक निगम, शहर, कस्बा और वार्ड स्तर पर विधेयक की प्रतियां जलाई गईं। डीएमके ने आम जनता से अपील की है कि वे अगले तीन दिनों तक अपने घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर काले झंडे लगाकर केंद्र के इस कदम की निंदा करें। सीएम आवास के बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच कार्यकर्ताओं ने काले झंडे लहराकर नारेबाजी की।
दक्षिणी राज्यों की ताकत छीनने का आरोप
मुख्यमंत्री स्टालिन ने परिसीमन को तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों के लिए एक गंभीर खतरा बताया है। उनके विरोध के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं।
उत्तरी राज्यों का वर्चस्व: स्टालिन का आरोप है कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने से उत्तरी राज्यों की राजनीतिक ताकत बढ़ेगी और दक्षिणी राज्यों की आवाज दबाई जाएगी।
सजा या इनाम: उन्होंने सवाल उठाया कि क्या जनसंख्या नियंत्रण में सफलता पाने के लिए दक्षिणी राज्यों को उनकी लोकसभा सीटें कम करके सजा दी जा रही है?
दूसरे दर्जे का नागरिक: उन्होंने चेतावनी दी कि यह प्रक्रिया दक्षिण भारतीयों को ‘दूसरे दर्जे का नागरिक’ बनाने की एक साजिश है।
सीएम स्टालिन ने इसे काला कानून करार देते हुए कहा कि दिल्ली में बैठी भाजपा सरकार को अब तमिलनाडु अपनी असली ताकत दिखाएगा। उन्होंने केंद्र के उस दावे को भी खारिज किया जिसमें कहा गया था कि दक्षिणी राज्यों में सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी। स्टालिन के अनुसार, हकीकत में सीटों का निर्धारण केवल उत्तरी राज्यों की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।
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