यूजीसी-नेट परीक्षा में सफलता के लिए कड़ी मेहनत, योजनाबद्ध अध्ययन और आत्मविश्वास ज़रूरी हैं: डॉ. लक्ष्मण सिंह देव
Sandesh Wahak Digital Desk: बिहार के गया कॉलेज, उर्दू विभाग में यूजीसी-नेट परीक्षा में सफलता विषय पर एक विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। सफलता कड़ी मेहनत, धैर्य और निरंतर संघर्ष का दूसरा नाम है। ज्ञान प्राप्त करने का जुनून ही इंसान को सफलता की ऊंचाइयों तक ले जाता है। यूजीसी-नेट में सफलता के लिए कड़ी मेहनत, सही योजना और आत्मविश्वास बहुत ज़रूरी हैं।
छात्रों को न केवल परीक्षा को अपना लक्ष्य बनाना चाहिए, बल्कि ज्ञान प्राप्त करने को भी अपना लक्ष्य बनाना चाहिए। निरंतर कड़ी मेहनत और सकारात्मक सोच ही सफलता की असली कुंजी हैं। सफल वही होता है जो असफलता के बाद भी हार नहीं मानता। ये बातें उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के जाने-माने विद्वान और ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ के अनुसार भारत के सबसे शिक्षित व्यक्ति डॉ. लक्ष्मण सिंह देव ने कहीं। ज्ञात हो कि डॉ. देव ने 13 विषयों में यूजीसी-नेट परीक्षा उत्तीर्ण की है। उन्होंने गया कॉलेज, गया के उर्दू विभाग में आयोजित एक विशेष व्याख्यान में अऐ विचार व्यक्त किए और अपने अनुभव को साझा किया। उन्होंने यह भी कहा कि असफलता कभी भी सफलता की राह में कोई स्थायी बाधा नहीं होती।
उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए छात्रों से कहा कि एक समय ऐसा भी था जब वे स्कूल की परीक्षा केवल 39% अंकों के साथ ही उत्तीर्ण कर पाए थे और उन्हें कई असफलताओं का सामना करना पड़ा था, लेकिन आज उन्हें देश के सबसे अधिक शिक्षित लोगों में से एक माना जाता है। इसलिए आप भी निरंतर और सतत प्रयास करते रहें तो कामयाबी ज़रूर हासिल होगी। इस अवसर पर, उन्होंने संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर को उनकी शैक्षिक सेवाओं का उदाहरण देते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण सेवाएँ दीं तथा अपनी कड़ी मेहनत, ज्ञान और दृढ़ संकल्प के माध्यम से समाज को एक नई दिशा प्रदान की।
उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे डॉ. अंबेडकर के जीवन से प्रेरणा लें और शिक्षा को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाएँ। उन्होंने छात्रों को यूजीसी-नेट परीक्षा, शैक्षिक संघर्ष और सफलता के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया। अपने संबोधन में, उन्होंने यूजीसी-नेट परीक्षा की तैयारी के लिए सही योजना बनाने, पुस्तकों का अध्ययन करने, समय का उचित उपयोग करने और निरंतर पढ़ाई करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे केवल डिग्री प्राप्त करने के बजाय, प्रतिदिन कुछ नया सीखने की आदत डालें और अपने ज्ञान तथा समझ का विस्तार करें।

शॉल और स्मृति-चिह्न भेंट कर किया स्वागत
विशेष व्याख्यान से पूर्व, उर्दू विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अब्दुलहई ने अतिथि वक्ता को शॉल और स्मृति-चिह्न भेंट कर उनका स्वागत किया और उनका परिचय कराया। उन्होंने इस विशेष व्याख्यान के उद्देश्य और लक्ष्य के बारे में भी बताया और कहा कि डॉ. लक्ष्मण सिंह देव ने 13 अलग-अलग विषयों में यूजीसी-नेट परीक्षा पास की है, जिसके कारण उन्हें ‘इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स 2022’ में देश के सबसे ज़्यादा पढ़े-लिखे लोगों में शामिल किया गया।
उन्होंने राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, भारतीय संस्कृति, तुलनात्मक धर्म, नृत्य, नाटक, इस्लामी अध्ययन, जैन अध्ययन और कई अन्य विषयों में नेट परीक्षा पास की है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इसके अलावा, उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षाओं में 33 बार सफलता हासिल की है और अनुसंधान के क्षेत्र में भी बेहतरीन सेवाएँ दी हैं। डॉ. लक्ष्मण सिंह देव ने दुनिया की दूसरी सबसे खतरनाक दौड़, ‘रेड द हिमालयज़’ (Raid de Himalayas) में भी तीन बार हिस्सा लिया है, जो दुनिया की सबसे ऊँची मोटर स्पोर्ट्स प्रतियोगिता है।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए विभाग के शिक्षक डॉ. मो. मिन्हाजुद्दीन ने कहा कि आज हमारे विभाग के लिए यह गर्व की बात है कि डॉ. लक्ष्मण सिंह देव, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है, हमारे बीच मौजूद हैं और हमें अपने विभाग में ऐसी महान हस्ती का स्वागत करते हुए खुशी हो रही है। उनकी कहानी इस बात का सबूत है कि अगर किसी इंसान में दृढ़ संकल्प और हिम्मत हो, तो वह किसी भी मुश्किल का सामना कर सकता है। इस कार्यक्रम में ग़ालिब जावेद, ज़ीनत परवीन, इम्तियाज़ अहमद, शहाबुद्दीन आदि के साथ-साथ MA और BA के छात्र-छात्राएं, उर्दू विभाग के सहायक अबू हुज़ैफ़ा, रवि शंकर और गीता देवी आदि भी मौजूद थे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की प्रस्तुति के साथ हुआ।
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