योगी सरकार का बड़ा फैसला: मुख्यमंत्री आवास योजना की लिस्ट में हुआ बड़ा बदलाव, जानें किसे मिलेगा लाभ
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के सबसे वंचित और पिछड़े तबकों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। ‘डबल इंजन’ सरकार ने ‘मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण’ का दायरा बढ़ाते हुए प्रदेश की उन सभी अनुसूचित जनजातियों (ST) को इसमें शामिल कर लिया है, जो अब तक पक्के मकान की सुविधा से महरूम थीं। मंगलवार को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इसका औपचारिक ऐलान करते हुए अधिकारियों को त्वरित सर्वे के निर्देश दिए।
अब कोई भी जनजातीय परिवार नहीं रहेगा ‘बिना छत’
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने घोषणा की कि सरकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के लिए संकल्पित है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने इन जातियों को केवल ‘वोट बैंक’ समझा, जबकि हमारी सरकार उन्हें सम्मान और पक्की छत दे रही है।
शामिल नई जातियां: भोटिया, जौनसारी, राजी और गोंड समेत प्रदेश की शेष सभी अनुसूचित जनजातियां अब इस योजना की पात्र होंगी।
2018 से अब तक: 18 से अधिक जातियों को मिला लाभ
मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की शुरुआत 2018 में हुई थी। तब से अब तक इसका दायरा लगातार बढ़ाया गया है। इसकी शुरुआत वनटांगिया और मुसहर जैसी अति-पिछड़ी जातियों से हुई। इसके बाद कोल, थारू, सहरिया, नट, चेरो, बैगा, बोक्सा, बंजारा और सपेरा जैसी करीब 18 जातियों को जोड़ा गया। अब सरकार ने शत-प्रतिशत संतृप्ति (Saturation) का लक्ष्य रखते हुए सभी शेष समूहों को पात्रता सूची में जगह दी है।
सर्वे के निर्देश: कच्चे घरों और झोपड़ियों से मिलेगी मुक्ति
सरकार का उद्देश्य उन दूरदराज के इलाकों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षा देना है जो आज भी प्रतिकूल परिस्थितियों में कच्चे घरों में गुजर-बसर कर रहे हैं। उपमुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि इन जातियों के परिवारों का तत्काल सर्वे कर उनकी सूची तैयार की जाए, ताकि जल्द से जल्द आवास स्वीकृत किए जा सकें। माना जा रहा है कि इस कदम से न केवल जनजातियों का जीवन स्तर सुधरेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
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