पीएम मोदी का नीदरलैंड दौरा, दोनों देशों के बीच संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदलने का फैसला
Sandesh Wahak Digital Desk: भारत और नीदरलैंड ने अपने आपसी संबंधों को एक नई ऊंचाई देते हुए इन्हें रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर ले जाने का बड़ा फैसला किया है। नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के विशेष निमंत्रण पर हेग पहुंचे भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दो दिवसीय आधिकारिक दौरे को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने नीदरलैंड के किंग विलेम अलेक्जेंडर, क्वीन मैक्सिमा और प्रधानमंत्री जेटन के साथ उच्च स्तरीय व डेलिगेशन स्तर की बैठकें कीं। रॉयल पैलेस में किंग और क्वीन ने भारतीय प्रधानमंत्री के सम्मान में दोपहर के भोज की मेजबानी भी की। यह पीएम मोदी की नीदरलैंड की दूसरी आधिकारिक यात्रा थी।
दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने सदियों पुराने व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों को याद करते हुए एक व्यापक ‘रणनीतिक साझेदारी रोडमैप’ का स्वागत किया। इसके तहत रक्षा, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम सिस्टम, स्पेस, सस्टेनेबिलिटी, क्लाइमेट चेंज, क्लीन एनर्जी, वॉटर मैनेजमेंट और उच्च शिक्षा जैसे भविष्य के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मिलकर काम करने पर सहमति बनी है।
अन्तरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग और वैश्विक सुधार
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की वकालत की। डच पीएम रॉब जेटन ने सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के दावे का एक बार फिर पुरजोर समर्थन किया, जिसके लिए पीएम मोदी ने उनका आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही दोनों देशों ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता पूरी होने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए रणनीतिक सहयोग बढ़ाने का स्वागत किया। नीदरलैंड ने इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव में शामिल होने की भी घोषणा की है।
कई महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर
इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
तकनीक और सेमीकंडक्टर: धोलेरा (गुजरात) में सेमीकंडक्टर फैब को बढ़ावा देने के लिए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और एएसएमएल के बीच महत्वपूर्ण करार हुआ।
ऊर्जा और पर्यावरण: ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा देने के लिए भारत-नीदरलैंड रोडमैप और नीति आयोग व डच प्रशासन के बीच ऊर्जा परिवर्तन को लेकर समझौता हुआ।
कृषि और पशुपालन: त्रिपुरा में फूलों के लिए और बेंगलुरु में डेयरी ट्रेनिंग के लिए इंडो-डच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी।
शिक्षा और संस्कृति: नालंदा विश्वविद्यालय और नीदरलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रोनिंगन के बीच अकादमिक सहयोग के साथ-साथ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और लेडेन यूनिवर्सिटी के बीच भी समझौता हुआ।
अन्य क्षेत्र: माइग्रेशन और मोबिलिटी, क्रिटिकल मिनरल्स, गुजरात के कल्पसर वॉटर प्रोजेक्ट के लिए तकनीकी सहयोग और चिकित्सा अनुसंधान को लेकर भी समझौते किए गए।
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