मिडिल ईस्ट के युद्ध क्षेत्र से बचकर 20 हजार टन रसोई गैस लेकर भारत पहुंचा विदेशी जहाज सिमी
Sandesh Wahak Digital Desk: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भीषण सैन्य तनाव और असुरक्षित समुद्री रास्तों के बीच भारत के घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। मार्शल आइलैंड्स के ध्वज वाला और लगभग 20 हजार टन लिक्विड प्रोपेन व ब्यूटेन (रसोई गैस) से लदा मालवाहक जहाज सिमी गुजरात के कांडला स्थित दीनदयाल बंदरगाह पर सुरक्षित रूप से डॉक कर गया है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) द्वारा कतर के रास लफ्फान टर्मिनल से खरीदी गई यह खेप पिछले 75 दिनों से जारी युद्ध के कारण ठप पड़े समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार करके भारत पहुंची है।
इस बेहद खतरनाक मिशन के दौरान अमेरिकी नाकेबंदी और ओमान की खाड़ी में ईरानी नौसेना के कड़े पहरे के बीच जहाज को सुरक्षित निकालने के लिए भारत सरकार ने उन्नत रणनीतिक पैंतरेबाजी का सहारा लिया। जहाज पर सवार सभी 21 विदेशी चालक दल के सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं।
4 मंत्रालयों ने संभाला मोर्चा
बुधवार को जब यह जहाज सबसे संवेदनशील युद्ध क्षेत्र से गुजर रहा था, तब रडार की निगरानी और संभावित गोलाबारी से बचने के लिए जहाज के ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) ट्रांसपोंडर्स को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था। इस अभूतपूर्व रणनीति की बदौलत जहाज दुश्मन के रडार को चकमा देकर ईरान के लारक द्वीप के पूर्व में सुरक्षित रूप से पहुंचने में कामयाब रहा।
इस मिशन को पर्दे के पीछे से सफल बनाने के लिए भारत सरकार के भीतर चार प्रमुख मंत्रालयों के बीच चौबीसों घंटे निर्बाध समन्वय देखा गया। बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने इसकी आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया, डीजी शिपिंग, विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के बीच स्थापित 24×7 कंट्रोल रूम और अभूतपूर्व तालमेल के कारण ही इस जहाज का सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित हो पाया है।।
घटते घरेलू एलपीजी स्टॉक को मिलेगी संजीवनी
मार्च की शुरुआत से अब तक सिमी इस खतरनाक समुद्री बाधा को सफलतापूर्वक पार करने वाला 13वां भारतीय मालवाहक जहाज बन गया है। कुकिंग गैस की यह खेप भारत के घरेलू बाजार के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है, क्योंकि पश्चिम एशिया संकट के चलते पिछले ढाई महीनों में देश का कुल वाणिज्यिक गैस और कच्चे तेल का भंडार तेजी से खाली हो रहा था।
कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केपलर की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस युद्ध के छिड़ने से पहले भारत के राष्ट्रीय भंडार में 10.7 करोड़ बैरल कच्चा तेल उपलब्ध था, जो लगातार बाधाओं के कारण 15 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ अब महज 9.1 करोड़ बैरल रह गया है। ऐसे में ‘सिमी’ का कांडला पहुंचना और इसके पीछे आ रहे वियतनामी टैंकर एनवी सनशाइन (46,427 टन ईंधन) की सुरक्षित आवाजाही भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम है।

