दिल्ली हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत कई AAP नेताओं को भेजा अवमानना नोटिस
Sandesh Wahak Digital Desk: दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, सांसद संजय सिंह, पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज के साथ-साथ पार्टी नेता विनय मिश्रा और दुर्गेश पाठक को आपराधिक अवमानना मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
हाई कोर्ट ने इन सभी नेताओं को निर्देश दिया है कि वे अगले चार सप्ताह के भीतर अदालत में अपना जवाब दाखिल करें। इस मामले की अगली सुनवाई अब 4 अगस्त 2026 को तय की गई है। गौरतलब है कि मंगलवार को हुई इस सुनवाई के दौरान नेताओं की तरफ से कोई भी कानूनी प्रतिनिधि कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ। अदालत ने इस मामले की निष्पक्षता के लिए एक एमिकस क्यूरी (न्यायालय मित्र) नियुक्त करने की बात कही है, साथ ही रजिस्ट्री को आदेश दिया है कि इस मामले से जुड़े सोशल मीडिया के सभी रिकॉर्ड्स को सुरक्षित करके केस फाइल का हिस्सा बनाया जाए।
न्यायपालिका को बदनाम करने का सुनियोजित अभियान
इस मामले की शुरुआत 14 मई को हुई थी, जब हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए आप (AAP) नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का फैसला किया था। अदालत का मानना है कि आबकारी नीति मामले की कानूनी कार्यवाही को लेकर न्यायपालिका की साख को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर एक सोची-समझी मुहिम चलाई गई थी।
मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वरना कांता शर्मा ने एक विस्तृत आदेश में स्पष्ट किया कि जब उन्होंने पूर्व में इस केस की सुनवाई से खुद को अलग करने से मना कर दिया था, तब उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट्स, वीडियो और बयान जारी किए गए। कोर्ट के अनुसार, ये गतिविधियां किसी फैसले की निष्पक्ष आलोचना के दायरे से बाहर थीं और सीधे तौर पर आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आती हैं।
जस्टिस शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि यदि संबंधित पक्षों को हाई कोर्ट के किसी फैसले या प्रक्रिया से आपत्ति थी, तो उनके पास देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) जाने का कानूनी विकल्प मौजूद था। लेकिन ऐसा करने के बजाय सार्वजनिक रूप से पत्र और वीडियो प्रसारित किए गए, जिनमें अदालत पर राजनीतिक रूप से पक्षपाती होने के आरोप लगाए गए और यह संदेश देने की कोशिश की गई कि इस कोर्ट से न्याय मिलना मुमकिन नहीं है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने चेताया कि इस तरह का आचरण आम जनता के मन में न्यायपालिका के प्रति अविश्वास की भावना पैदा करता है और यदि ऐसी प्रवृत्तियों पर समय रहते लगाम नहीं लगाई गई, तो इससे न्यायिक व्यवस्था में अराजकता की स्थिति पैदा हो सकती है। इस पूरे विवाद और अवमानना की कार्यवाही शुरू होने के बाद, जस्टिस शर्मा ने खुद को आबकारी नीति मामले की मुख्य सुनवाई से पूरी तरह अलग कर लिया है।
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