यूपी में ड्रंकन ड्राइविंग के खिलाफ चला महाअभियान, 16 हजार से ज्यादा वाहनों के कटे चालान

Lucknow News: उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों की संख्या में कमी लाने और यातायात व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए पुलिस प्रशासन ने एक बड़ा राज्यव्यापी कदम उठाया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण के निर्देशों पर और अपर पुलिस महानिदेशक (यातायात निदेशालय) के मार्गदर्शन में मई महीने के दो सप्ताहांतों (9, 10, 16 और 17 मई 2026) को प्रदेश भर में शराब पीकर वाहन चलाने वालों (ड्रंकन ड्राइविंग) के खिलाफ एक विशेष संयुक्त चेकिंग अभियान चलाया गया। परिवहन विभाग के सहायक संभागीय अधिकारियों के सहयोग से चले इस अभियान की निगरानी जनपदीय नोडल अधिकारियों और क्षेत्राधिकारियों ने की।

विगत वर्षों के आंकड़ों के विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि साल 2023 में 8.61%, 2024 में 6.05% और 2025 में 3.51% सड़क दुर्घटनाएं सिर्फ शराब पीकर गाड़ी चलाने के कारण हुईं। समीक्षा में यह भी पाया गया कि वीकेंड्स (शनिवार-रविवार) की रात को लोग अक्सर नशे की हालत में गाड़ी मुख्य मार्गों पर दौड़ाते हैं, जिससे निर्दोष नागरिकों की जान जोखिम में पड़ जाती है। इसी प्रवृत्ति को रोकने के लिए इस बार टोल प्लाजाओं की हर लेन पर विशेष टीमें तैनात की गई थीं।

डंपरों की एचएसआरपी भी जांची गई

इस हाईटेक अभियान के तहत टोल प्लाजा पर तैनात टीमों को टॉर्च, रिफ्लेक्टिव जैकेट, बॉडी वॉर्न कैमरा, लाउड हेलर और अत्याधुनिक ब्रेथ एनालाइजर दिए गए थे। अभियान में एक अनूठी मानवीय पहल भी देखने को मिली; तैनात महिला पुलिसकर्मियों ने परिवार के साथ सफर कर रही महिलाओं से “Meet and Greet” प्रक्रिया के तहत मुलाकात की। महिला पुलिस ने महिला यात्रियों से उनका कुशलक्षेम पूछा और यात्रा के दौरान सुरक्षा या अन्य समस्याओं के समाधान के लिए मदद की पेशकश की।

इसके साथ ही, हाईवे पर निर्माण सामग्री ले जाने वाले डंपरों और भारी ट्रकों की हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) का मौके पर ही सत्यापन किया गया। साथ ही, बाइकों और अन्य गाड़ियों में लगे मॉडिफाइड साइलेंसर, प्रेशर हॉर्न और हूटर/लाल-नीली बत्ती के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की गई।

जानिए क्या कहता है नियम

मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 185 के तहत शराब पीकर गाड़ी चलाना एक गंभीर और दंडनीय अपराध है।

तय सीमा: यदि जांच के दौरान रक्त में अल्कोहल की मात्रा 30 mg प्रति 100 ml (0.03% BAC) से अधिक पाई जाती है, तो कानूनी कार्रवाई तय है।

पहली बार पकड़े जाने पर: 10,000 रुपये का आर्थिक जुर्माना या 6 महीने की जेल, अथवा दोनों सजायें साथ हो सकती हैं।

दूसरी बार (पुनरावृत्ति) पकड़े जाने पर: जुर्माना बढ़कर 15,000 रुपये या 2 साल की जेल, अथवा दोनों का प्रावधान है।

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