बुद्ध जन्मस्थली लुम्बिनी में प्रवेश शुल्क हुआ महंगा, भारतीय पर्यटकों और बौद्ध श्रद्धालुओं की जेब पर बढ़ा बोझ
Siddharthnagar News: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में स्थित भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा ककरहवा से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित भगवान बुद्ध की पावन जन्मस्थली लुम्बिनी से बड़ी खबर आ रही है। लुम्बिनी स्थित ऐतिहासिक मायादेवी मंदिर में प्रवेश शुल्क (एंट्री फीस) बढ़ाए जाने से भारत से जाने वाले पर्यटकों और बौद्ध श्रद्धालुओं को अब अपनी जेब और ढीली करनी पड़ेगी। लुम्बिनी विकास कोष द्वारा 1 मई, 2026 से लागू की गई नई दरों के कारण सीमा पार करने वाले भारतीय सैलानियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ने लगा है।
संशोधित शुल्क व्यवस्था के तहत भारतीय पर्यटकों के लिए प्रवेश टिकट की कीमत 64 रुपये से बढ़ाकर अब 80 रुपये कर दी गई है। सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि सार्क (SAARC) देशों और म्यांमार से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह शुल्क 400 रुपये से सीधे 700 रुपये और अन्य देशों के विदेशी पर्यटकों के लिए 700 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा परिसर में चलने वाले ई-रिक्शा और टेंपो के प्रवेश शुल्क को भी दोगुना कर दिया गया है।
उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र के श्रद्धालुओं पर पड़ेगा असर
लुम्बिनी बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए वैश्विक आस्था का केंद्र है, जहाँ हर साल भारत समेत पूरी दुनिया से लाखों लोग आते हैं। भारत के उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र राज्यों से प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में बौद्ध भिक्षु और आम पर्यटक ककरहवा बॉर्डर के रास्ते मायादेवी मंदिर के दर्शन करने पहुंचते हैं। अचानक हुई इस वृद्धि से खासकर सीमावर्ती क्षेत्रों के स्थानीय यात्रियों और मध्यम वर्गीय परिवारों का बजट प्रभावित होगा।
एक तरफ जहाँ विदेशियों के लिए दरें बढ़ाई गई हैं, वहीं नेपाली नागरिकों के लिए 20 रुपये का पुराना शुल्क ही लागू रहेगा। इसके साथ ही रूपन्देही, कपिलवस्तु और पश्चिम नवलपरासी जिलों के स्थानीय नागरिकों को उनके पहचान पत्र (आईडी कार्ड) के आधार पर मुफ्त प्रवेश की रियायत दी गई है। बौद्ध भिक्षुओं, भिक्षुणियों और लामा गुरुओं को भी इस शुल्क से पूरी तरह मुक्त रखा गया है।
फीस बढ़ाना गलत: लुम्बिनी होटल संघ
इस फैसले का खुद नेपाल के भीतर भी विरोध शुरू हो गया है। लुम्बिनी होटल संघ के अध्यक्ष लिलामणि शर्मा ने चिंता जताते हुए कहा कि वर्तमान में लुम्बिनी आने वाले पर्यटकों का औसत ठहराव महज 22 से 28 मिनट का ही है। ऐसे समय में जब पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सुविधाएं बेहतर की जानी चाहिए थीं, प्रशासन द्वारा प्रवेश शुल्क बढ़ा देना पर्यटन उद्योग के हित में नहीं है।
सीमावर्ती ककरहवा कस्बे के निवासी मनोज भारती ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मायादेवी मंदिर की फीस बढ़ने से भारतीय श्रद्धालुओं पर अनावश्यक आर्थिक भार पड़ेगा। वहीं स्थानीय व्यवसायी प्रभु दयाल गुप्ता का कहना है कि चूंकि लुम्बिनी आने वाले सैलानियों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी भारतीयों की है, इसलिए भारत से आने वाले लोगों के लिए इस तरह शुल्क बढ़ाना बेहद निराशाजनक है।
रिपोर्ट- जाकिर खान
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