ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के खिलाफ सिद्धार्थनगर में कल बंद रहेंगी मेडिकल की दुकानें

Siddharthnagar News: ऑनलाइन दवाओं की अवैध बिक्री और ई-फार्मेसी के बढ़ते चलन के खिलाफ ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट की ओर से बुधवार को बुलाए गए देशव्यापी भारत बंद का व्यापक असर सिद्धार्थनगर जिले में भी देखने को मिलेगा। इस आंदोलन के तहत जिले के सभी छोटे-बड़े मेडिकल स्टोर पूरी तरह बंद रहेंगे। दवा व्यवसायियों के इस कदम को उत्तर प्रदेश उत्तराखंड मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन की स्थानीय इकाई ने भी अपना पूरा नैतिक समर्थन देने का एलान किया है।

दवा विक्रेता समिति के जिला अध्यक्ष जमील सिद्दीकी ने आंदोलन की वजहों को साफ करते हुए कहा कि बिना किसी कड़े नियम-कायदों के चल रही ऑनलाइन दवा कंपनियां और बड़े कॉर्पोरेट घराने प्रिडेटरी प्राइसिंग (लागत से कम कीमत पर सामान बेचना) की नीति अपना रहे हैं। इस अनैतिक व्यापारिक होड़ के कारण जमीन पर दुकान चलाने वाले छोटे और मध्यम दर्जे के मेडिकल स्टोर संचालकों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इसी के विरोध में सर्वसम्मति से जिले की सभी दवा दुकानें बंद रखने का फैसला लिया गया है।

UPMSRA सिद्धार्थनगर इकाई के अध्यक्ष अरुण पाठक द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में ऑनलाइन ई-फार्मेसी के दुष्प्रभावों पर गहरी चिंता जताई गई है। उन्होंने कहा कि बिना किसी पुख्ता जांच-परख के इंटरनेट के जरिए दवाएं बेचने से न सिर्फ पारंपरिक केमिस्ट बेरोजगार हो रहे हैं, बल्कि आम उपभोक्ताओं तक नकली, एक्सपायर्ड और बेहद घटिया क्वालिटी की दवाइयां पहुंचने का जोखिम भी कई गुना बढ़ गया है। इसके अलावा, ऑनलाइन माध्यमों से नशीली और प्रतिबंधित दवाओं की बेरोकटोक सप्लाई हो रही है, जो आज की युवा पीढ़ी और समाज के लिए एक बड़ा खतरा बन चुकी है।

ड्रग एक्ट की मूल भावना के खिलाफ काम कर रही सरकार: संगठन

दवा व्यापारी संगठनों ने सरकार की दोहरी नीतियों पर भी कड़ा ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि सरकारी नियमों के मुताबिक किसी भी मेडिकल स्टोर को तब तक लाइसेंस नहीं दिया जाता जब तक वहां एक योग्य फार्मासिस्ट मौजूद न हो। लेकिन दूसरी तरफ सरकार खुद ही ऑनलाइन दवा प्लेटफार्मों को बढ़ावा दे रही है, जहां बिना किसी कड़े सत्यापन के दवाएं डिलीवर हो जाती हैं। यह पूरी तरह से ‘ड्रग एक्ट’ (औषधि अधिनियम) की मूल भावना के विपरीत है।

UPMSRA ने जिले के सभी मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स से अपील की है कि वे 20 मई को केमिस्टों के इस आंदोलन के समर्थन में मजबूती से खड़े रहें। संगठन ने संदेश देते हुए कहा कि केमिस्ट और एमआर एक ही स्वास्थ्य सेवा परिवार के दो अटूट अंग हैं और इस संकट की घड़ी में दोनों का एकजुट होना बेहद जरूरी है।

रिपोर्ट- जाकिर खान

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