तेल 200 डॉलर तक पहुंचने का खतरा, होर्मुज तनाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट

Sandesh Wahak Digital Desk : एनर्जी रिसर्च फर्म वुड मैकेंजी की एक रिपोर्ट ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को लेकर गंभीर चिंता जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक बंद रहता है, तो कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। ऐसी स्थिति में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा दबाव बन सकता है और मंदी का खतरा भी बढ़ सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि फरवरी 2026 में शुरू हुए ईरान युद्ध के बाद से ग्लोबल एनर्जी मार्केट में लगातार तनाव बना हुआ है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का सबसे अहम और संवेदनशील मार्ग माना जाता है। इसके बाधित होने से दुनिया भर की सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।

तेल और LNG सप्लाई पर गहरा असर, भारत के लिए बढ़ेगी चुनौती

रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा हालात में खाड़ी देशों के 1.1 करोड़ बैरल से अधिक कच्चे तेल और कंडेनसेट उत्पादन पर असर पड़ा है। इसके साथ ही वैश्विक LNG सप्लाई का करीब 20% हिस्सा भी प्रभावित हो रहा है। वुड मैकेंजी ने अपनी रिपोर्ट में तीन संभावित स्थितियों—तत्काल शांति, सीमित समझौता और लंबे समय तक व्यवधान—का जिक्र किया है।

भारत के लिए यह स्थिति खास तौर पर चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि देश दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और उसकी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से पूरा होता है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आता है, तो पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं, जिससे आम लोगों पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। साथ ही रुपये पर दबाव, आयात बिल में बढ़ोतरी और सरकार के सब्सिडी खर्च में इजाफा भी हो सकता है।

वुड मैकेंजी के मुख्य अर्थशास्त्री पीटर मार्टिन के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा बाजार का सबसे महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है और इसका लंबे समय तक बंद रहना केवल ऊर्जा संकट नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार और आर्थिक विकास के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

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